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चाइनीज पिस्‍टलों की तस्‍करी से पांच भाइयों की गैंग ने जमा की अकूत सम्‍पत्ति

– बाल्मिकीनगर में बनवाई बड़ी बड़ी कोठियां, देते हैं अपराधियों को संरक्षण

– आंखों में धूल झोंकने के लिए खरीदी हैं जेसीबी मशीनें और ट्रैक्‍टर ट्रालियां  

मोहन श्याम गौड़ ।

बिहार, पश्चिमी चम्पारन, वाल्मिकी नगर।

नेपाल और भारत की सीमा पर बिहार से सटे वाल्मिकीनगर कस्‍बे से चाइनीज पिस्‍टलों की तस्‍करी करने वाले पांच भाइयों की गैंग ने अपने इस अवैध धन्‍धे की मदद से अकूत सम्‍पदा जमा की है। आलम तो यह है कि इनकी यहां पर आधा दर्जन बड़ी बड़ी कोठियां हैं। यही नहीं एसएसबी और अन्‍य गुप्‍तचर संस्‍थाओं की आखों में धूल झोंकने के लिए इस गिरोह ने दो जेसीबी मशीनों के साथ ही ट्रैक्‍टर ट्रालियां भी खरीदी हैं। ताकि उन्‍हें यह शक न हो कि उनके पास पैसा कहां से आता है। उसी को ढाल के रुप में इस्‍तेमाल किया जाता है।

चाइनीज पिस्‍टल की तस्‍करी वाले इस गिरोह ने अकूत सम्‍पत्ति जमा की है। इस अकूत सम्‍पत्ति के जरिए उन्‍होने वाल्मिकीनगर जैसे टापू पर तकरीबन आधा दर्जन कोठियां बनवाई है। इन्‍हीं कोठियों में अक्‍सर इनके गिरोहों की डीलिंग होती है। कई कोठियों में कहां पर डीलिंग हो रही है। इसको न तो पुलिस समझ पाती है, न ही एसएसबी की टीम । नेपाल-बिहार सीमा से सटे वाल्मिकीनगर नामक टापू पर वैसे तो रोजी-रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं है। लेकिन इसके बाद भी पॉच भाईयों के इस ग्रुप में दो-दो जेसीबी मशीन है। यही नहीं कई टैक्ट्रर-ट्राली भी है। अब सवाल यह उठता है कि जहॉ पर रोजी-रोजगार की कोई खास व्यवस्था ना हो वहॉ पर बीस से पच्चीस लाख रूपये में मिलने वाली जेसीबी मशीन क्यो खरीदी गयी। जबकि एक-एक जेसीबी मशीन का मासिक फाइनेन्स किस्त पचास-पचास हजार रूपये आता है। इस सम्बन्ध में दबी जुबान लोगों ने बताया कि यहॉ पर बालू, पत्थर और मिट्टी की चोरी-छिपे खुदाई की जाती है। जिसमें जेसीबी मशीन से कम समय में काम का अन्जाम दे दिया जाता है।

जेसीबी मशीन का यह धन्धा दिखावा मात्र है। वाल्मिकीनगर में बालू, पत्थर और मिट्टी की खुदाई से कोई भी जेसीबी मशीन का पचास-पचास हजार रूपये मासिक किस्त नहीं जमा कर सकता है। यह सिर्फ पुलिस और एसएसबी को धोखा देने के लिये है। ताकि पुलिस और एसएसबी यह समझे कि वे चाइनीज पिस्‍टलों की तस्‍करी नहीं बल्कि इन मशीनों से धन्‍धा करते हैं।

 

दोहरी नागरिकता भी है इस गिरोह के सदस्‍यों के पास

पांच भाइयों का यह ग्रुप नागरिकता के लिए बनाए गए नियमों का भी उल्‍लंघन करता है। विश्‍वस्‍त सूत्रों की माने तो इन पॉच भाईयों का नेपाल स्थित सुस्ता गॉव में भी खेती-बाड़ी और अपना मकान है। वे नेपाल की भी नागरिकता लिए हुए हैं। ताकि अगर भारत में पुलिस और एसएसबी का दबाव बने तो वे अपराधियों के लिए स्‍वर्ग कहे जाने वाले सुस्‍ता क्षेत्र में जाकर बस जाएं। नेपाल स्थित इनके मकानों में अपराधियों का गिरोह शरण लेता है। इसकी एवज में उन्‍हें भारी रकम भी मिलती है। यहां यह बता देना समीचीन होगा कि किसी भी व्‍यक्ति के पास दोहरी नागरिकता नहीं हो सकती है।

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चाइनीज पिस्‍टल की तस्‍करी : भाग 1 चाइनीज पिस्‍टल की तस्‍करी : भाग – 2

 

इस गिरोह की चलती है वाल्मिकीनगर में पूरी दबंगई

इस गिरोह की दबंगई पूरे वाल्मिकीनगर में चलती है। दबंगई को लेकर हैरान करने वाली बात तो यह है कि स्थानीय विधायक भी इन पॉच भाईयो से भयभीत रहते है। जिसके पीछे कारण यह बताया जाता है कि इन पॉचों भाईयो ने कुछ साल पूर्व विधायक के पिता को बुरी तरह पीट दिया था और सत्ता में रहने के बावजूद विधायक इनका कुछ भी नहीं बिगाड़ पाये थे। जबकि विधायक अगर चाहते तो इनके दोहरी नागरिकता वाले मामले को विधानसभा में उठा सकते थे। साथ ही उनके उपर पुलिस और प्रशासन का दबाव बनवाकर बदला भी ले सकते थे। लेकिन इनके गिरोह में अपराधियों की इतनी आम दरफ्त है कि विधायक भी कुछ नहीं बोल सके।

 

शेष आगे की किश्‍तों में …… क्रमश:

 

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