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प्रेगनेन्‍सी के दौरान बच्‍चा नोट करता है माताओं की ये बातें

प्रैग्नेंसी के समय हर पेरेंटस अपने बच्चों से बात करने की कोशिश करते है। ऐसा कहा जाता है कि जन्म से पहले गर्भाश्य में पल रहें बच्चें को बाहरी हलचलों के बारे में कोई अहसास नहीं होता लेकिन ऐसा नहीं है। एक अध्ययन के दौरान ये बात सामने आई है कि प्रैग्नेंसी नौवें महीने में बच्चा बाहर की आवाजों को थोड़ी बहुत महसूस कर सकता है। बाहर की कुछ अवाजें सुनकर बच्चें की ह्रदय गति में हल्का-सा बदलाव आने लगता है। इसी के कारण गर्भाश्य में पल रहा बच्चा थोड़ी बहुत हरकत भी करने लगता है।

1. क्या कहती है रिसर्च
इस रिसर्च के दौरान 20 से अधिक गर्भवती महिलाओं ने हिस्सा लिया था। इन सभी महिलाओं का आठवां महीना चल रहा था। इस रिसर्च के दौरान इनके सामने कुछ विशेष प्रकार का आवाजें की गई जिसे सुनकर बच्चें अपनी प्रतिक्रिया दे रहें थे। इसी बात को अधार बना कर शोधकर्ताओं ने ये निष्कर्ष निकाला कि बच्चा आठवें महीने से अवाजें सुन सकता है।

2. सुनने की क्षमता 
एक रिसर्च के परिणाम को देखकर इस बात को सिद्ध किया गया है कि जन्म से पहले ही उनकी सुनने की क्षमता विकसित होने लग जाती है। जिससे बच्चा जन्म लेने से पहले सब कुछ थोड़ा-थोड़ा सीख जाता है। जन्म लेने के बाद उनकी इस क्षमता का ज्यादा विकास होने पर वो धीरे-धीरे बोलने और सुनने लगता है।

3. क्या भ्रूण को सुनाई देती हैं आवाज़ें ? 
सबसे पहले बच्चा अवाजों को महसूस करने की कोशिश करता है। बार-बार सुनाई देने वाली अवाजों को बच्चा पहचाने लग जाता है। मां के शरीर में हो रही हलचलों और आवाज़ों को बच्चा सबसे पहले सुनना शुरु करता है। जिससे जन्म के बाद वो सबसे पहले मां की अवाज को पहचानता है।

4. सुनने की क्षमता का‍ विकास 
शोधकर्ताओं के अनुसार बच्चे की सुनने की क्षमता कुछ विशेष ध्वनियों के कारण विकसित होती है। इसके साथ ही बच्चे के आडिट्री कोर्टेक्स‍ का भी विकास होना शुरु हो जाता है। इसी के कारण जन्म के बाद बच्चे को सुनने और बोलने में असानी होती है।

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