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भादो महीने में होगा पापों का नाश, महीने भर रखें इन बातों का ध्‍यान

ज्योतिषशास्त्र के पंचांग खंड की पूर्णिमान्त प्रणाली अनुसार दिनांक 08.08.17 से हिंदू पंचांग का छठा माह भाद्रपद अर्थात भादो प्रारंभ हो रहा है। मान्यतानुसार भाद्रपद माह चातुर्मास के चार पवित्र महीनों में से दूसरा महीना है। इसे आम भाषा में भाद्र या भादवा नाम से बुलाया जाता है। ज्योतिषशास्त्र भाद्रपद माह की पूर्णिमा सदैव पूर्वा या उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में पड़ती है तथा आकाशगंगा में पूर्वा भाद्रपद अथवा उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के योग बनने से इस माह का नाम भाद्रपद रखा गया है। भाद्रपद महीने में सनातन धर्म के अनेक पर्व आते हैं। जिनमें जन्माष्टमी व गणेशोत्सव मुख्य हैं। भादो मास में पड़ने वाले इन विशिष्ट उत्सवों ने सदियों से भारतीय धर्म परम्पराओं और लोक संस्कृति को समृद्ध किया है।


भाद्रपद माह में स्नान, दान तथा व्रत करने से जन्म-जन्मान्तर के पाप नाश हो जाते हैं। भादो में अनेक लोक व्यवहार के कार्य निषेध होने के कारण यह माह शून्य मास भी कहलाता है। भादो में नए घर का निर्माण, विवाह, सगाई आदि मांगलिक कार्य शुभ नहीं माने जाते, इसलिए भादो में भक्ति, स्नान-दान के लिए उत्तम समय माना गया है। भाद्रपद माह धार्मिक तथा व्यावहारिक नजरिए से जीवनशैली में संयम और अनुशासन को अपनाना दर्शाता है। इसलिए इसमें कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य बताया गया है। शास्त्रनुसार भाद्रपद माह में कुछ कार्य निषेद्ध हैं तथा कुछ खाद्य सामाग्री पर भी वर्जना बताई गयी है। इन वर्जनाओं और निर्देशन के पीछे वैज्ञानिक और संस्कृति उद्देश भी है।

भादो महीने  में क्या न करें

गुड नहीं खाएं अन्यथा स्वर बिगड़ जाता है।

तिल का तेल नहीं खाएं अन्यथा उम्र घटती है।

दही नहीं खाएं अन्यथा स्वास्थ्य बिगड़ जाता है।

दूसरे का दिया भात न खाएं अन्यथा लक्ष्मी घटती है।

नारियल का तेल नहीं खाएं अन्यथा संतति सुख में कमी आती है।

भादो महीने में क्या करें

मक्खन ज़रूर खाएं इससे उम्र बढ़ती है।

गाय का घी खाएं इससे पुष्टि मिलती है।

गाय का दूध पिए इससे वंश वृद्धि होती है।

पानी में गौमूत्र डालकर स्नान करें इससे पाप नाश होता है।

बिना मांगा एकभुक्त भोजन करें इससे पुण्य की प्राप्ति होती है।

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