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श्रीराम जन्‍म भूमि विवाद : शिया वक्‍फ बोर्ड विवादित जगह से अलग मस्जिद बनाने को तैयार

नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 11 अगस्त से करने का फैसला किया है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने 3 जजों की स्पेशल बेंच तैयार की है। इससे पहले शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश किये गए हलफनामे में कहा कि वो विवादित जगह से हट कर मस्जि़द बनाने को तैयार है। मसले के शांतिपूर्ण हल के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन होना चाहिए।

हलफनामे में शिया वक्फ बोर्ड ने वैकल्पिक जगह पर मस्जि़द बनाने का प्रस्ताव भी दिया है। बोर्ड के मुताबिक एक ही जगह पर मंदिर और मस्जि़द होने से भविष्य में भी विवाद की आशंका रहेगी। इससे बचने के लिए मस्जि़द दूसरी जगह पर बनाना बेहतर होगा। बोर्ड ने कहा है- हमें राम का स्थान मानी जाने वाली जगह से अलग मुस्लिम बहुल इलाके में ज़मीन दी जाए. हम वहां मस्जि़द बनाने को तैयार हैं।

विवादित जमीन को 3 हिस्से में बांट चुका है हाईकोर्ट
गौरतलब है कि 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अयोध्या में विवादित ज़मीन को 3 हिस्से में बांटने का आदेश दिया था। इसमें एक हिस्सा राम जन्मभूमि न्यास, एक निर्मोही अखाड़े और एक सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को दिया गया था।

शिया वक्फ बोर्ड ने सुन्नियों के दावे को ठहराया गलत 
शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने विवादित ज़मीन पर सुन्नियों के दावे को गलत बताया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में बोर्ड ने कहा है कि बाबरी मस्जिद बनवाने वाला मीर बाक़ी शिया था। इसलिए, विवादित ज़मीन पर शिया वक्फ बोर्ड का हक है।

शिया वक्फ बोर्ड ने कमेटी बनाने का दिया सुझाव 
अपने हलफनामे में शिया वक्फ बोर्ड ने मसले के हल के लिए एक कमेटी बनाने का भी सुझाव दिया है। बोर्ड ने कहा है- सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमिटी बने. इसमें हाई कोर्ट के 2 रिटायर्ड जजों, पीएमओ और मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रतिनिधियों के साथ मामले के तमाम पक्षकार भी शामिल हों। कमिटी विवाद का शांतिपूर्ण हल निकाले।

सुप्रीम कोर्ट ने विवाद को कोर्ट के बाहर सुलझाने का दिया सुझाव
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद को कोर्ट के बाहर सुलझाने का सुझाव दिया था। ये एक ऐसा विवाद है, जिसकी आंच में भारतीय राजनीति आजादी के बाद से ही झुलसती रही है। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहा दी गई थी, जिसका मुकदमा आज भी लंबित है।

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