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हामिद अंसारी के बयान पर नायडू का पलटवार : राजनैतिक प्रचार है अल्‍पसंख्‍यक मुद्दा

नई दिल्ली: नव निर्वाचित उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने आज देश में अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा की भावना होने की बात को महज ‘‘राजनीतिक प्रचार’’ बताकर खारिज कर दिया। नायडू ने यद्यपि किसी का नाम नहीं लिया लेकिन उनकी टिप्पणी को पूर्व उप-राष्ट्रपति अंसारी के एक टीवी साक्षात्कार की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के मुसलमानों में असहजता और असुरक्षा की भावना है, और स्वीकार्यता का माहौल खतरे में है। नायडू ने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि अल्पसंख्यक असुरक्षित है। यह एक राजनीतिक प्रचार है। पूरी दुनिया के मुकाबले अल्पसंख्यक भारत में ज्यादा सकुशल और सुरक्षित हैं और उन्हें उनका हक मिलता है।

अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं हुआ कभी भेदभाव
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इतिहास इस बात का प्रमाण है कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ कोई भेदभाव नहीं हुआ। नायडू ने कहा कि भारत अपने राजनेताओं की वजह से नहीं बल्कि अपने लोगों और सभ्यता की वजह से धर्मनिरपेक्ष हैं। कथित असहिष्णुता की घटनाओं के बारे में पूछे जाने पर नायडू ने कहा कि भारत एक विशाल देश है और ‘इक्का-दुक्का मामले’ सामने आ सकते हैं जो कुछ और नहीं अपवाद हैं। नायडू ने कहा कि कुछ लोग राजनीतिक वजहों से ऐसे मामलों में तिल का ताड़ बना देते हैं। कुछ लोग तो इस स्तर तक चले जाते हैं कि वे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर ऐसे मुद्दों को उठाकर देश को बदनाम तक करने लगते हैं। कुछ समुदायों के बीच दरार डालकर राजनीतिक स्वार्थसिद्धि के लिए ऐसा करते हैं । मूल समस्या वोट बैंक राजनीति और एक खास समुदाय को वोटबैंक माने जाने की वजह से है। देश के अगले उप-राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेने से एक दिन पूर्व उन्होंने कहा कि राजनेताओं को उनकी सलाह है कि वे समुदायों को राजनीति में न घसीटें।

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