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मतगणना समाप्‍त होने के बाद हरकत में आए एसपी ने संभाली व्‍यवस्‍था

 – तुरन्‍त ही हारे हुए प्रत्‍याशी के समर्थकों को मौके से हटवाया

– सूझबूझ का परिचय देते हुए दोनों पक्षों को आमने सामने नहीं आने दिया

संतकबीरनगर। न्‍यूज केबीएन

जिला पंचायत के चुनाव को लेकर जिले के एसपी हेमराज मीना ने काफी सतर्कता का परिचय दिया। आलम तो यह था कि जहां एक ओर भारी संख्‍या में पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया था। वहीं जब जरुरत पड़ी तो एसपी खुद ही अपने मातहतों के समर्थन में मैदान में आ गए। मतगणना समाप्‍त होने के बाद उन्‍होने हारे हुए प्रत्‍याशी और उनके समर्थकों को मतगणना की गुणा गणित समझने का अवसर ही नहीं दिया और उनके तकरीबन 5 हजार से अधिक समर्थकों को 5 मिनट के अन्‍दर ही मौके से हटवा दिया। यही नहीं उनके पीछे पुलिस बल भी तैनात कर दिया। ताकि जाते समय वे पीछे से कहीं कोई उपद्रव न कर दें।

मतगणना के बाद कलेक्‍ट्रेट के सामने स्थित खलीलाबाद मेंहदावल मार्ग पर घूमते हुए एसपी हेमराज मीणा

जब तक जिला पंचायत अध्‍यक्ष पद के लिए मतदान और मतों की गिनती चलती रही, तब तक पुलिस अधीक्षक हेमराज मीना अपने कार्यालय में बैठे रहे। अपर पुलिस अधीक्षक के जिम्‍मे उन्‍होने पूरी व्‍यवस्‍था दे दी। इसके बाद अपनी तीसरी आंख ( लोकल इन्‍टेलीजेन्‍स यूनिट) के जरिए स्थितियों की जानाकारी करते रहे। ज्‍यों ही मतगणना का परिणाम घोषित हुआ और हारा हुआ प्रत्‍याशी बाहर आया। उसके बाद उन्‍होने सुबह से उस जगह पर काबिज रहे सपाइयों को मौके से 5 मिनट के अन्‍दर ही बाइज्‍जत हटवा दिया। वे खुद ही पुलिस टीम को उत्‍साहित करते रहे। साथ ही उनका मनोबल बढ़ाने के लिए पुलिस टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे। वहीं भाजपा की विजयी प्रत्‍याशी को तुरन्‍त ही एक गनर एलाट करवा दिया। साथ ही सीओ और महिला थानाध्‍यक्ष अनीता यादव को उनकी गाड़ी में बैठाकर सुरक्षित उनके स्‍थान पर पहुंचवा दिया। पुलिस सुरक्षा के इन्‍तजामों के साथ ही एसपी की हनक का ही नतीजा रहा कि पूरा चुनाव शान्तिपूर्ण ढंग से सम्‍पन्‍न हो गया। कहीं पर कोई पत्‍ता भी नहीं खड़का।

 

सपा हो या भाजपा, किसी के साथ नहीं रही रियायत

पिछले कई चुनावों में देखा गया कि जब प्रदेश में सपा की सरकार थी तो जिले के सपाइयों की दबंगई चलती थी। वे नियमों की धज्जियां उड़ाते थे। चाहे वह पर्चा दाखिला हो या फिर कोई स्‍थानीय चुनाव प्रक्रिया। लेकिन इस बार न तो सपा के लोगों की चली और न ही भाजपा के ही लोगों की। नियम सबके लिए बराबर थे। किसी के साथ कोई रियायत नहीं थी। इस बार पुलिस न तो किसी की कठपुतली थी और न ही किसी के रौब दाब में आ रही थी।

परिन्‍दा भी पर न मार सके : कुछ इस तरह से की गई थी कलेक्‍ट्रेट की सुरक्षा

हारने के बाद भी सपाइयों ने फोड दिए पटाखे

चुनाव हारने के बाद जब सपा के प्रत्‍याशी कलेक्‍ट्रेट के सभाकक्ष से बाहर निकले तो एक पत्रकार जो उनका नजदीकी था उसने उनसे पूछा कि क्‍या हुआ। इसके बाद प्रत्‍याशी ने कहा कि 17- 14 । इसके बाद तो उक्‍त पत्रकार ने आनन फानन में बाहर बैठे उनके समर्थकों में से किसी को फोन कर दिया। नतीजा यह हुआ कि बाहर सपा के समर्थक पटाखे छोड़ने के साथ ही जोरदार नारेबाजी करने लगे। यही नहीं जब पार्टी का हारा हुआ प्रत्‍याशी बाहर पहुंचा तो उसे आनन फानन में कन्‍धे पर भी उठा लिया। इसके बाद प्रत्‍याशी ने कन्‍धे से उतारने की बात की और बताया कि हार गए। इसके बाद तो सपा के खेमे में मायूसी छा गई।

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