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खलीलाबाद का शमसान : जहां सेल्‍फी लेने के लिए आते हैं लोग, खेलते हैं बच्‍चे

– जनपद की चारो सीटों पर विकास की नहीं मिल रही काट

– विकास के भ्रष्‍टाचार के विश्‍लेषण में जुटे हैं विरोधी प्रत्‍याशी

संतकबीरनगर। न्‍यूज केबीएन

ये कोई पार्क नहीं है, यह खलीलाबाद नगर पालिका परिषद के द्वारा बनवाया गया शमशान है जहां बच्चे खेलने के साथ ही सेल्‍फी भी लेने आते हैं

निकाय चुनाव का प्रचार धीरे धीरे अपने अन्तिम दौर में पहुंच रहा है। जिले में मौजूद 1 नगर पालिका परिषद और 3 नगर पंचायतों में विरोधी प्रत्‍याशी कहीं न कहीं निवर्तमान नगर पंचायत अध्‍यक्षों से ही लड़ रहे हैं। चाहे वह प्रत्‍यक्ष रुप से हो या फिर परोक्ष रुप से। निवर्तमान अध्‍यक्षों के द्वारा कराया गया विकास कार्य प्रत्‍याशियों के द्वारा किए जा रहे दावों और वायदों पर पूरी तरह से हाबी दिख रहा है। विरोधियों को कहीं भी इसकी कोई काट नहीं मिल रही है। इसके चलते अब वे विकास में मौजूद भ्रष्‍टाचार के विश्‍लेषण में जुट गए हैं। लेकिन पब्लिक है कि उनके विश्‍लेषण को सिरे से खारिज कर देती है।

शमसान पर लोगों को बैठने के लिए बना विश्रामस्‍थल

जिले में नगर निकायों में विकास की शुरुआत जिले की छोटी सी नगर पंचायत हरिहरपुर से हुई। 5 साल में ही इस नगर पंचायत ने अपने तत्‍कालीन अध्‍यक्ष पप्‍पू शाही के नेतृत्‍व में विकास के कीर्तिमान स्‍थापित किए। इसके बाद हुए चुनाव में फिर पप्पू शाही के समर्थक को ही विजयश्री मिली। नतीजा यह हुआ कि 2012 में हुए निकाय चुनाव के बाद नगर पालिका परिषद खलीलाबाद के साथ ही साथ नगर पंचायत मगहर व नगर पंचायत मेंहदावल के अध्‍यक्षों ने भी विकास के इस माडल को अख्तियार कर लिया। हरिहरपुर के साथ ही खलीलाबाद, मेंहदावल और मगहर में पिछले 5 सालों में विकास के अभूतपूर्व कार्य हुए। ऐसे ऐसे कार्य हुए जो पिछले 30 सालों में नहीं हो सके थे। ऐसा नहीं था कि ये सारे अध्‍यक्ष सत्‍ताधारी पार्टी के थे। सभी अलग अलग राजनैतिक दलों से थे। लेकिन इसके बावजूद विकास हुआ ही नहीं उसने बहुत उंची छलांग लगाई। विकास का आलम तो यह रहा कि अगर कोई व्‍यक्ति जो 6 साल पहले इन कस्‍बों में आया हो और अब आए तो वह पहचान ही नहीं पाएगा कि वह अपने 6 साल पुराने कस्‍बे में है। विकास के इसी माडल की काट विरोधियों को नहीं मिल पा रही है। उनके द्वारा भी विकास के तमाम वायदे किए जा रहे हैं। लेकिन निवर्तमान को परख चुकी जनता उनसे संतुष्‍ट दिख रही है। विकास का यह माडल जनता को भी खूब भा रहा है और वह अपना मन बना चुकी है।

शमशान में बना हुआ तरणताल जिसमें लोग दाह संस्‍कार के बाद नहाते हैं

 विकास का गंभीर विश्‍लेषण कर रहे ठेकेदार

नगर पंचायतों में विकास के इन कार्यों का विश्‍लेषण करने में ठेकेदारों का एक गुट जुटा हुआ है। लोगों को यह बताता है कि यह विकास नहीं हुआ है, बल्कि भ्रष्‍टाचार हुआ है। 15 रुपए की ईट 22 रुपए में लगाई गई है। मानक के अनुसार गिट्टी नहीं पड़ी है। सारा कार्य घटिया हुआ है। दो साल में ही सब कुछ खराब हो जाएगा। जो सामान प्रयो‍ग हुआ है उसका मूल्‍य कम है, कागज में अधिक दिखाया गया है। लेकिन इस तरह का विश्‍लेषण करने वालों की मंशा जनता बखूबी समझ रही है। जहां वह विकास में भ्रष्‍टाचार की बात कह रहे हैं, वहीं जनता विकास के कई उदाहरण उनके सामने पटक दे रही है। प्रश्‍न यह उठता है कि जब नगर निकायों में इतना भ्रष्‍टाचार हो रहा था तब ये लोग आगे आकर क्‍यों नहीं बोले। क्‍यों नहीं विकास कार्यों की जांच के लिए कहीं गए।

 

शमसान में लगी हुई भगवान शिव की यह प्रतिमा

विकास के लिए सत्‍ताधारी पार्टी का होना जरुरी नहीं

 

जिले की चारो निकायों में यह बात लोगों को समझाई जा रही है कि जब आपका अध्‍यक्ष सत्‍ताधारी पार्टी का होगा तो नगर निकाय का बहुत तेजी से विकास होगा। यह कहकर जनता को मूर्ख बनाने की कोशिश करने वालों को भी जनता जबाव देने से नहीं चूकती है। वह सवाल करती है कि आखिर भाजपा का नगर पंचायत अध्‍यक्ष होकर सपा शासन में अश्विनी ने कैसे विकास किया, मेंहदावल में बसपा के नगर पंचायत अध्‍यक्ष मोतीलाल ने विकास कैसे किया और हरिहरपुर में पप्‍पू शाही के नेतृत्‍व में विकास कैसे हुआ। निकायों की अपनी अलग व्‍यवस्‍था होती है। उनका एक अलग कोष होता है। पैसे के लिए उन्‍हें किसी सत्‍ताधारी का मुंह नहीं देखना पड़ता है। बस उसके अन्‍दर विकास की इच्‍छाशक्ति होनी चाहिए।

दाह संस्‍कार के लिए बनाया गया शेड

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