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संतकबीरनगर में लिखा गया लोकतन्‍त्र के चीरहरण का नया अध्‍याय

  • पहली बार जनता के वोटों के साथ सत्‍ता ने किया खिलवाड़
  • अभी तक केवल परोक्ष चुनावों में ही चलती थी सत्‍ता की मनमानी

अरुण सिंह, न्‍यूज केबीएन

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अरुण सिंह

1 दिसम्‍बर की शाम को जब सूरज अस्‍ताचलगामी हो रहा था, रात्रि का प्रहर आने वाला था। उसी समय एचआरपीजी कालेज में बने नगर निकाय चुनाव के मतगणना केन्‍द्र में लोकतन्‍त्र के चीरहरण का एक नया अध्‍याय लिखा जा रहा था। अब तक तो लोकतन्‍त्र के चीरहरण के कई अध्‍याय लिखे जा चुके हैं, लेकिन यह अध्‍याय कुछ अलग ही था। पहले यह चीरहरण जनता के वोटों से चुने गए बिकने और खरीदे जाने वाले जनप्रतिनिधियों का होता था। लेकिन यह चीरहरण सीधे जनता के वोटों का किया गया था, वह भी एक छोटी सी नगर पालिका पर कब्‍जे के लिए। परोक्ष रुप से होने वाले चुनावों में मनमानी का तो इस‍ जिले में इतिहास बना हुआ है। लेकिन यह एक नया अध्‍याय लिखा गया, और बाकायदा इसकी शुरुआत भी कर दी गई।

नगर पालिका परिषद खलीलाबाद के समर को जीतने के लिए सबसे अ‍नुशासित पार्टी मानी जाने वाली भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासन की हदें ही तोड़ दीं। नगर पालिका परिषद खलीलाबाद का अध्‍यक्ष पद का प्रत्‍याशी चीख चीखकर यह कह रहा था कि मेरे साथ अन्‍याय हो रहा है। मेरे वोट घटाए जा रहे हैं। जबकि मैं चुनाव जीत चुका हूं । मेरे पास मौजूद लिस्‍ट से हमारे वोटों का मिलान तो करवा दीजिए। लेकिन निर्वाचन अधिकारी के कानों के नीचे जूं तक नहीं रेंग रही थी। एसडीएम खलीलाबाद वोटों का मिलान करवाने के लिए कम्‍प्‍यूटर पर बैठे तभी मतगणना केन्‍द्र का एक अधिकारी गायब हो गया। मिलान हो ही रहा था, तब तक जिला निर्वाचन अधिकारी मौके पर पहुंचे और सभी लोगों को बाहर किया इधर प्रत्‍याशी जगत जायसवाल वोटों का मिलान करा रहे थे तो दूसरी ओर भाजपा के प्रत्‍याशी को एक कोने में ले जाकर जीत का प्रमाण पत्र थमा दिया गया।

यह सब कुछ ऐसे हुआ था जैसे मानो इसकी पाटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी। खलीलाबाद में हुए विकास पर मिट्टी डालकर उसकी कब्र बनाई और अपना मुरझाया हुआ कमल खिला दिया था। लेकिन जिले में लोकतन्‍त्र के चीरहरण का नया अध्‍याय शुरु करने का श्रेय भारतीय जनता पार्टी को ही जाएगा। अब जब जब जिले में इस तरह से लोकतन्‍त्र का चीरहरण होगा तो यह अध्‍याय जरुर याद किया जाएगा। जब भाजपा के साथ ऐसा होगा तो वह कहीं फरियाद करने लायक भी नहीं रहेगी, तब लोग यही कहेंगे कि शुरुआत तो आपने ही की थी।

…. और अन्‍त में

जनता सब देख रही है, वक्‍त पर देगी जबाव

राजनैतिक गलियारों में हमेशा यह बातें सुनाई देती हैं कि जनता की याददाश्‍त बहुत ही कमजोर होती है। समय के साथ वह सबकुछ भूल जाती है। लेकिन ऐसा नहीं है, जनता को सब कुछ याद रहता है। वह भूलती कुछ नहीं है, समय का इन्‍तजार करती है, और उसका जबाव भी देती है। सत्‍ता के बल पर तीन साल पहले ही तत्‍कालीन समाजवादी सरकार ने जनता के वोटों से नहीं बल्कि उसके द्वारा चुने जाने वाले जनप्रतिनिधियों के वोटों के साथ खिलवाड़ किया था। संतकबीरनगर जनपद की जिला पंचायत अध्‍यक्ष नीना देवी इस बात की गवाह हैं। सत्‍ता के बल पर उनका भी चीरहरण किया गया। जनता ने मौन होकर देखा और आने वाले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की जिले में ही नहीं प्रदेश में जो दुर्गति हुई वह किसी से छिपी नहीं है। वह भी प्रतिकार जनता ने तब किया था जब उसके वोटों से चुने गए जनप्रतिनिधियों के वोटों के साथ खिलवाड़ हुआ। यहां तो सीधे जनता के वोट जुड़े हुए हैं।

 

अब तो लोग अपनी मेहनत से जीते भाजपाइयों पर उठा रहे उंगली

संतकबीरनगर में जिस तरह से लोकतन्‍त्र की धज्जियां उड़ाई गई। बसपा प्रत्‍याशी जगत जायसवाल जो चुनाव जीत चुके थे उन्‍हें हराया गया। इस बात की जानकारी जब आसपास के जिलों के साथ ही साथ अन्‍य स्‍थानों पर हुई है। या फिर यहीं की मगहर नगर पंचायत क्षेत्र के लोगों को हुई तो वे अब वहां के प्रत्‍याशी की जीत पर भी धीरे धीरे उंगली उठाने लगे हैं। उन्‍हें यह लगने लगा है कि कहीं उनके प्रत्‍याशियों को भी इसी तरह से तो नहीं जिताया गया। एक आह काफी होती है बहुत बड़ा बड़ा साम्राज्‍य नेस्‍तनाबूद करने के लिए । संतकबीरनगर से फैली यह चिनगारी अब बहुत दूर तक जाएगी। भले ही कुछ हो या न हो, जनता को हकीकत से तो रुबरु होना चाहिए।

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