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बाबा तामेश्‍वरनाथ की महिमा है अनन्‍त, दूर दूर से आते हैं भक्‍त

– द्वितीय काशी का दर्जा प्राप्‍त है तामेश्‍वारनाथ धाम को

– कुन्‍ती ने यहीं पर आकर की थी भगवान शिव की आराधना

संतकबीरनगर। अरुण सिंह

खलीलाबाद-धनघटा मार्ग के आठ किमी पर दक्षिण की तरफ तामेश्वर नाथ धाम स्थित है। जिला मुख्यालय से यहां पहुंचने के लिए मैनसिर चौराहा और इसके पूरब नौरंगिया होते हुए जाना पड़ता है। तामेश्वर नाथ धाम के नाम से पुलिस चौकी भी स्थापित है।

महाभारत कालीन तामेश्‍वरनाथ धाम मन्दिर

कोतवाली थाने की तामेश्‍वरनाथ पुलिस चौकी के सामने शिव मंदिर का मुख्य द्वार है। धनघटा की तरफ से भी आने वाले श्रद्धालुओं को मैनसिर चौराहा और इसके पूरब नौरंगिया होते हुए जाना पड़ता है। देवाधिदेव महादेव बाबा तामेश्वरनाथ धाम को द्वितीय काशी का दर्जा प्राप्त है। द्वापर युग में पाडवों के अज्ञातवास के दौरान माता कुंती ने यहा शिव की आराधना कर राजपाट के लिए आशीर्वाद मांगा था। राजकुमार सिद्धार्थ यहा वल्कल वस्त्र त्याग कर मुंडन कराने के पश्चात तथागत बने। धाम का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। यहां स्वत: शिवलिंग प्रगट होने का प्रमाण मिलता है। इस स्थान को पूर्व में ताम्र गढ़ के नाम से जाना जाता था। यहां स्थापित शिव लिंग को दूसरे स्थान पर ले जाने का भी प्रयास हुआ लेकिन संभव नही हो सका। खलीलाबाद नगर को बसाने वाले खलीलुरर्हमान ने भी काफी प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस शिव लिंग की महत्ता की जानकारी होने पर डेढ़ सौ वर्ष पूर्व तत्कालीन बांसी नरेश राजा रतन सेन सिंह ने यहा मंदिर का स्वरूप दिया। बाद में सेठ रामनिवास रुंगटा ने औलाद की मुराद मांगी। उन्होंने औलाद प्राप्ति के बाद मंदिर को विस्तार दिया।

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