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अमेरिकी राजदूत ने पाकिस्‍तान को लेकर चीन को दिए स्‍पष्‍ट संकेत

वाशिंगटन: अमरीका के एक शीर्ष राजनयिक ने मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंध लगवाने के भारत के प्रयासों को बार बार बाधित करने वाले चीन को स्पष्ट संकेत देते हुए कहा कि जैश ए मोहम्मद के प्रमुख को संयुक्त राष्ट्र द्वारा एक आतंकवादी के रूप में नामित किए जाने की भारत की मांग पर ‘तथ्यपरक विचार’ करने वाला कोई भी इस मामले का समर्थन करेगा।China, pakistan, american ambessdar, Indian DJ, Donald trump, Barak obama, america, alvida, Newskbn , santkabirnagar, Newskbn, india, American

भारत में अमरीका के राजदूत रिचर्ड वर्मा ने  एक साक्षात्कार में कहा, ‘हमें इन आपत्तियों को समझना होगा और उन पर काम करना होगा। इस मामले पर तथ्यपरक विचार करने वाला कोई भी (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अजहर को) नामित किए जाने का समर्थन करेगा।’उन्होंने कहा कि अमरीका इस बात से निराश है कि सुरक्षा परिषद ने इस मामले को न तो अभी तक पारित किया है बल्कि इस मामले में यदि चीन ‘आतंकवाद का साथ’ देता है तो वह इस पर सीधे तौर पर बात करने से भी बचता रहा है।

वर्मा ने कहा, ‘हमने लश्कर एवं जैश ए मोहम्मद में अतिरिक्त समूहों को नामित किया है ताकि इन समूहों पर दबाव बनाया जा सके। हमारा मानना है कि उन्हें (अजहर एवं अन्य) संयुक्त राष्ट्र में नामित करना सही होगा।’ उन्होंने कहा, ‘हम निराश है कि हम अभी तक ऐसा नहीं कर पाए हैं।’ वर्मा ने हालांकि उम्मीद जताई कि डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन इन मामलों में भारत के साथ सहयोग करेगा। उन्होंने कहा, ‘मेरे पास यह मानने का कारण है कि नया प्रशासन (भारत के साथ) समन्वित तरीके से काम करेगा।  लोगों को उनके कार्यों के लिए जवाबदेह बनाना बहुत महत्वपूर्ण है।’

राजनीतिक नियुक्ति के तहत वर्मा का कार्यकाल राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के साथ ही समाप्त हो जाएगा। पिछले 2 साल से नई दिल्ली में काम कर रहे वर्मा ने कहा कि ये द्विपक्षीय संबंधों के सर्वश्रेष्ठ वर्ष रहे हैं। पाकिस्तान की ओर से होने वाली आतंकवादी गतिविधियों के संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में वर्मा ने कहा कि बराक ओबामा ने पाकिस्तान के साथ ईमानदारी से और मुश्किल बातचीत की है। उन्होंने कहा, ‘आतंकवाद अमरीका, भारत और  पाकिस्तान के लोगों के सामने  सबसे बड़ा खतरा है और हमें इसके खिलाफ एकजुट होकर खड़े होना होगा। इस समस्या से कोई एक देश नहीं निपट सकता।

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