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कन्‍नौज हादसा : आखिर कौन है हादसे का जिम्‍मेदार, प्रबन्‍धन या प्रशासन

  • क्‍या यात्रा पर गई 13 स्‍कूली बसें लम्‍बी यात्रा के लिए उपयुक्‍त थीं
  • क्‍या बसों को दूसरे प्रदेश में ले जाने के लिए बनवाया गया था परमिट

संतकबीरनगर। अरुण कुमार सिंह

कन्‍नौज हादसे ने संतकबीरनगर जनपद के 7 होनहार लाल छीन लिए। इस घटना ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। स्थिति तो यह है कि संतकबीरनगर व आसपास के इलाकों से जब 7 अर्थियां उठीं तो लोग गम में डूब गए। लेकिन प्रश्‍न यह उठता है कि आखिर इसके लिए जिम्‍मेदार कौन है। स्‍थानीय प्रशासन ने भी इस बात की सुधि नहीं लेनी चाही । कारण चाहे जो भी हो, लेकिन इसके लिए जिम्‍मेदारी तो तय होनी ही चाहिए । जिम्‍मेदारी तय करने के लिए इन बातों का समझना भी जरुरी है।

क्‍या इस तरह की स्‍कूली बस से टूर ले जाया जा सकता है,इस

घटनाक्रम पर नजर डालें तो प्रभा देवी बीटीसी कालेज के साथ ही साथ विभिन्‍न स्‍थानों पर चलने वाले कई अन्‍य कालेजों के 550 बच्‍चों को शैक्षिक भ्रमण के लिए उत्‍तराखण्‍ड ले जाया जा रहा था। कालेजों के बच्‍चों को ले जाने के लिए ब्‍लूमिंग बड्स सीनियर सेकेण्‍डरी स्‍कूल खलीलाबाद की 13 बसों को हायर किया गया। इन 13 बसों में सवार होकर विभिन्‍न नामों से चल रहे 5 या 6 बीटीसी कालेजों के छात्र जा रहे थे। रास्‍ते में आगरा एक्‍सप्रेस वे पर बस का तेल खत्‍म होता है। बस में सवार छात्र गर्मी से बिलबिलाए हुए थे और वे सड़क पर उतर गए। इसी बीच सड़क पर आ रही एक बस ने 9 को कुचल दिया। जिसमें से 7 की मौत हो गई। इसे लेकर तमाम सवाल उठते हैं। क्‍या इन सवालों पर प्रशासन की नजर नहीं पहुंचती है।

1 – क्‍या ब्‍लूमिंग बड्स संस्‍था अपनी स्‍कूली बस किसी अन्‍य संस्‍था को किराए पर दे सकती है। ऐसी स्थिति में जब वह स्‍कूल बस के रुप में पंजीकृत है। यहां यह बता देना जरुरी है कि एक साथ प्रभा देवी समेत कई बीटीसी कालेजों के छात्रों को ब्‍लूमिंग बड्स एकेडमी की बसों से उत्‍तराखण्‍ड ले जाया जा रहा था।

2- स्‍कूली बस किसी भी स्थिति में व्‍यवसायिक प्रयोग में नहीं लाई जा सकती है। यह एक व्‍यवसायिक प्रयोग था। एक दूसरे स्‍कूल की बस दूसरे स्‍कूल के बच्‍चों को टूर पर लेकर जा रही थी । इसके लिए बाकायदा प्राइवेट बसें ही परमिट बनवाकर जा सकती हैं।

3 – क्‍या सारी 13 बसें पूरी तरह से फिट थीं, इन्‍हें  एआरटीओ से फिटनेस प्राप्‍त था। इन्‍हें दूसरे राज्‍य में ले जाया जा सकता था। उसके ड्राइवर व कण्‍डक्‍टर पहाड़ी क्षेत्रों में बसों को चलाने के लिए बैच लाइसेन्‍स रखते थे।

4- क्‍या इसके लिए एआरटीओ ने ब्‍लूमिंग बड्स सीनियर सेकेण्‍डरी स्‍कूल को परमिट दिया था, कि वे अपनी बसों को किसी दूसरे स्‍कूल को किराए पर दे दें । दूसरे राज्‍य में ले जाने का परमिट बनवाया गया था।

5- इतनी भीषण गर्मी में जहां बसों में 50 किलोमीटर की यात्रा ही भारी लगती है। वहां इन 550 बच्‍चों को तो 1800 किलोमीटर से अधिक की यात्रा करनी थी। क्‍या ऐसी बसों को ले जाना उपयुक्‍त था। इतनी दूरी तक जाने के लिए तो कम से कम एसी और हाई फ्लोर की बसें होनी चाहिए।

6- इतनी बड़ी टीम के साथ कितने जिम्‍मेदार लोग गए हुए थे। क्‍या 550 लोगों की टीम के साथ चिकित्‍सक, गाइड व अन्‍य लोग थे। क्‍या हर बस में चिकित्‍सक, गाइड व अन्‍य प्राधिकारियों की व्‍यवस्‍था थी।

7 – क्‍या एआरटीओ और स्‍थानीय प्रशासन को यह अवगत कराया गया था कि 500 से अधिक बच्‍चों को टूर इन्‍हीं बसों के जरिए । इन स्‍थानों को जा रहा है। यह नियम है कि प्रशासन को बताया जाए, ताकि व आगे इसकी सूचना प्रसारित कर दे।

8- जहां तक छात्रों का आरोप है कि हर छात्र से 8 हजार रुपए लिए गए थे, तो क्‍या 8000 रुपए की यही व्‍यवस्‍था थी। आखिर कालेज प्रशासन ने उन्‍हें पर्याप्‍त सुविधा क्‍यों नहीं दी। जबकि कालेज प्रशासन का यह दायित्‍व बनता है।

 

इसके साथ ही साथ अनेक सवाल हैं जो प्रशासन के साथ ही साथ प्रबन्‍धन को भी कटघरे में खड़ा करते हैं। प्रश्‍न यह है कि इस मामले की विधिवत जांच होनी चाहिए। बिना किसी के दबाव में आए ।

 

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