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पूर्वांचल में शिक्षा की लौ जलाकर पंचतत्‍व में विलीन हुए पं सूर्यनारायण चतुर्वेदी

– अयोध्‍या धाम में हुआ अन्तिम संस्‍कार, उमड़ी हजारों की भीड़ ने दी अन्तिम विदाई

– समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हुए शवयात्रा में, लोगों ने याद किये उनके कार्य

अरुण सिंह , संतकबीरनगर।

पूर्वांचल में शिक्षा को नया आयाम देने वाले तथा शिक्षा जगत के मालवीय के रुप में जाने जाने वाले पं सूर्य नारायण चतुर्वेदी का निधन बुधवार की रात्रि में हो गया। शिक्षा जगत के इस मनीषी का अयोध्‍या धाम में अन्तिम संस्‍कार हुआ और वे पंचतत्‍व में विलीन हो गए। उनकी शव यात्रा में हजारों की संख्‍या में लोगों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई तथा अयोध्‍या धाम पहुंचकर उन्‍हें अन्तिम विदाई दी।

भिटहां गांव से निकलती पं सूर्य नारायण चतुर्वेदी की अन्तिम यात्रा

जिले के नाथनगर ब्‍लाक क्षेत्र के भिटहां गांव के मूल निवासी पं सूर्य नारायण चतुर्वेदी ने बस्‍ती मण्‍डल में शिक्षा के व्यापक प्रसार के लिए कई दर्जन स्‍कूलों, कालेजों तथा शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालयों की स्‍थापना अल्‍प काल में ही कराई। ऐसे पं सूर्य नारायण चतुर्वेदी और आम जनता के बीच दादा जी के नाम से विख्‍यात मनीषी हमारे बीच नहीं रहे। 3 अक्‍टूबर की रात्रि में उन्‍होने अन्तिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही चारो तरफ शोक की लहर दौड़ गई। जो जहां था वहीं से उनके पैतृक गांव भिटहां की तरफ दौड़ पड़ा । स्थिति यह हुई कि राजनैतिक व्‍यक्तियों के साथ ही शिक्षाविद, चिकित्‍सक, अधिवक्‍ता, शिक्षक, छात्र उनके अन्तिम दर्शन को दौड़ पड़े । उनके निधन की खबर से सभी मर्माहत थे। उनके पैतृक गांव से उनकी शव यात्रा निकाली गई जो भारी भीड़ के साथ खलीलाबाद होते हुए अयोध्‍या धाम पहुंची । अयोध्‍या धाम में पवित्र सरयू के किनारे उनका अन्तिम संस्‍कार किया गया। बड़े पुत्र डॉ उदय प्रताप चतुर्वेदी ने उन्‍हें पारम्‍परिक रीति रिवाज के साथ मुखाग्नि दी ।

पं सूर्य नारायण चतुर्वेदी के साथ पं जनार्दन चतुर्वेदी व डॉ उदय प्रताप चतुर्वेदी की फाइल फोटो

शिक्षा जगत के मालवीय कहे जाने वाले पं सूर्य नारायण चतुर्वेदी को सभी ने नम आखों से विदाई दी। उनकी मौत पर सभी की आंखे नम थी। कारण यह था कि वे शिक्षा की लौ को जलाकर खुद इस दुनिया से रुखसत हो लिए। पं सूर्यनारायण चतुर्वेदी के निर्देशन में  उनके सुपुत्र डॉ उदय प्रताप चतुर्वेदी, राकेश चतुर्वेदी के साथ ही साथ पं जनार्दन चतुर्वेदी, विधायक दिग्विजय नारायण चतुर्वेदी उर्फ जय चौबे के साथ ही परिवार के अन्‍य सदस्‍य उनके सपनों को पूरा करने में लगे हुए थे। फिलहाल उनके जाने से एक ऐसा स्‍थान रिक्‍त हो गया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

 

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