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संतकबीरनगर में कौन रोकेगा महागठबन्‍धन का वार, जय चौबे या कोई चमत्‍कार

  • महागठबन्‍धन के कुशल खिलाड़ी के सामने टिक सकते हैं केवल जय चौबे
  • मात्र 24 दिन में पांचो विधानसभाओं को सहेजना किसी अन्‍य के वश की बात नहीं

अरुण सिंह । संतकबीरनगर

संतकबीरनगर में महागठबन्‍धन ने भी अपना प्रत्‍याशी घोषित कर दिया है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी अभी तक उहापोह की स्थिति में दिखाई दे रही है। प्रदेश नेतृत्‍व और केन्‍द्रीय नेतृत्‍व की बैठकों का सिलसिला थमने का विराम नहीं ले रहा है। जिले में महागठबन्‍धन के घोषित कुशल उम्‍मीदवार की कोई काट अभी तक भाजपा के पास भी नहीं है। ऐसे में महागठबन्‍धन के वार को कौन रोकेगा इस बात पर भी चर्चाओं का दौर जारी है। तर्क देने वालों के अपने अपने तर्क दे रहे हैं। लेकिन इनके बीच में यह बात हर मुंह से सुनाई दे रही है कि महागठबन्‍धन के वार को अगर कोई झेल सकता है तो वह या तो खलीलाबाद के सदर विधायक जय चौबे झेल सकते हैं, या फिर कोई चमत्‍कार हो जाए।

दिग्विजय नारायण चतुर्वेदी उर्फ जय चौबे

जिले में अब तक दो प्रत्‍याशी घोषित हो चुके हैं। एक कांग्रेस का प्रत्‍याशी, दूसरे महागठबन्‍धन के प्रत्‍याशी। पीडीए ने भी अपना एक प्रत्‍याशी घोषित किया है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने अभी अपने तुरुप के पत्‍तों को खोला नहीं है। प्रत्‍याशी पर विचार विमर्श चल रहा है। ऐसे में गठबन्‍धन के वार को कोई रोक सकता है तो वह या तो खलीलाबाद विधानसभा से विधायक दिग्विजय नारायण चतुर्वेदी उर्फ जय चौबे हैं, या फिर कोई चमत्‍कार ही महागठबन्‍धन के इस वार को रोक सकता है।

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जय चौबे को महागठबन्‍धन के इस वार को रोकने में सफलता इसलिए मिल सकती है, क्‍योंकि उनके पास एक पूरी टीम है, जो टीम 5 दिन में ही पांचो विधानसभाओं में अपना नेटवर्क खड़ा कर सकती है। यही नहीं लोकसभा क्षेत्र में स्थित पांचो विधानसभाओं के विधायक भी जय चौबे के साथ दिखाई दे रहे हैं। जय चौबे विधायक रहते हुए भी कभी ‘गगन बिहारी’  नहीं रहे हैं। वे हमेशा कार्यकर्ताओ, जनता और अपनों के बीच सहज भाव से रहते हैं। वह विधायक भले ही खलीलाबाद के हों, लेकिन जब किसी को जरुरत होती है, तो वह जय चौबे के ही पास आता है, उसका काम अगर सही है, तो वह उसके लिए एड़ी से चोटी तक जोर लगाने से भी नहीं चूंकते हैं। इसलिए नहीं कि आने वाले के साथ उनका कोई स्‍वार्थ जुड़ा होता है, बल्कि इसलिए कि वे आने वाला उनके पास उम्‍मीदों के साथ आया है। उसकी उम्‍मीदों के साथ अपनी उम्‍मीदों को जोड़कर देखते हैं और उसकी यथासंभव मदद करते हैं। यही नहीं पूरे जनपद में जय चौबे जिससे एक बार मिल लेते हैं वह उनका मुरीद हो जाता है। कारण यह है कि उन्‍होने कभी अपनी जमीन को नहीं छोड़ा है। बेहतर स्थितियों के बाद भी पैरों को जमीन पर ही टिकाकर रहने वाले जय चौबे की तारीफ हर वर्ग के लोग करते हैं। उन्‍होने कभी न तो किस को जातीय चश्‍मे से देखा और न ही कभी धार्मिक चश्‍मे से देखा। सभी को एक ही चश्‍मे से देखा। किसी और प्रत्‍याशी को लोकसभा क्षेत्र में किसी वर्ग विशेष का वोट पाने में नाको चने चबाने पड़े। लेकिन जय चौबे को गठबन्‍धन के वोटों में सेंध लगाने से कोई नहीं रोक सकता। चाहे वह ब्राह्मण हों, या फिर राजपूत, चौधरी हों, या फिर यादव,  दलित हों या फिर मुस्लिम। सभी में उनकी समान पकड़ है। ऐसी पकड़ वाला उम्‍मीदवार भाजपा को शायद ही मिले। भाजपा के परम्‍परागत वोटों के साथ ही उनके भी कुछ वोट पूरे लोकसभा क्षेत्र में हैं। ऐसे में जय चौबे भारतीय जनता पार्टी की नाव के एक खेवनहार हो सकते हैं। महागठबन्‍धन के कुशल उम्‍मीदवार के सामने अगर कोई टिक सकता है तो वह केवल जय चौबे ही हैं।

ऐसे में पार्टी को संतकबीरनगर लोकसभा सीट को अपने पाले में करने के लिए बहुत सोच समझकर ही निर्णय लेना होगा। अन्‍यथा पार्टी को बेहतर परिणाम के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। इसके बावजूद भी परिणाम क्‍या होगा, यह कहा नहीं जा सकता है।

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