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जीआर एकेडमी और मांटेसरी के बच्चें निकले शैक्षणिक भ्रमण पर, किसी ने देखा भगवान बुद्ध के जन्मस्थान तो किसी ने बौद्ध परिनिर्वाण स्‍थली (रिपोर्ट- देवीलाल गुप्त)

::— बच्‍चों के अन्‍दर दिखा शैक्षिक भ्रमण को लेकर जबरदस्‍त उत्‍साह
::— जीआर एकेडमी मेन ब्रांच के छात्राओं ने जाना नेपाल में लुम्बनी का इतिहास

::— जीआर मांटेसरी के बच्चों ने बुद्ध की धरती से कबीर की धरती पर पहुंचे छात्रों ने किया भ्रमण

संतकबीरनगर, न्‍यूज केबीएन :- शैक्षिक भ्रमण के कार्यक्रम की श्रृंखला के क्रम में एक तरफ जीआर एकेडमी मेन ब्रांच के विद्यार्थियों ने नेपाल में लुम्बनी में जाकर इसके ईतिहास के बारे में जानकारी इकठ्टा किया तो वहीं ख़लीलाबाद स्थित जीआर मांटेसरी के छात्र कुशीनगर के विभिन्‍न दर्शनीय स्‍थलों के भ्रमण के लिए रवाना हुए। लुंबिनी भगवान बुद्ध के जन्म स्थान के लिए रवाना होने के दौरान प्रबंधक प्रिंस त्रिपाठी व प्रधानाचार्य जमाल अहमद ने हरी झंडी दिखाकर शैक्षणिक यात्रा को रवाना किया। जीआर मांटेसरी के बच्‍चों के अन्‍दर कुशीनगर और गोरखपुर जाने का बहुत ही उत्‍साह दिखाई पड़ा।

एकेडमी की बसों में सवार होकर भ्रमण के लिए गए इन बच्‍चों ने बौद्ध परिनिर्वाण स्‍थली पर जाकर विभिन्‍न वस्‍तुओं का अध्‍ययन पूरी तन्‍मयता के साथ किया और हर्षित दिखाई पड़े। छात्र छात्राओं की शैक्षिक पर्यटन यात्रा को मुख्‍य संरक्षक घनश्‍याम त्रिपाठी,प्रबन्‍ध निदेशक प्रवीण त्रिपाठी ने हरी झण्‍डी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि बच्‍चों के लिए शैक्षिक पर्यटन जरुरी है। इसी के आधार पर वे कुछ नया वस्तएं व ऐतिहासिक स्थान देखकर कुछ समझने व सीखने का प्रयास करते हैं। बच्चे कुशीनगर से लौटने के गोरखपुर में नौका विहार तारामंडल, अंबेडकर पार्क, रेल म्यूजियम घूमने के साथ ही गोरखनाथ मंदिर का दर्शन भी किया।
प्रबंधक प्रवीण त्रिपाठी ने कि टूर पर जब बच्चों को कुछ नया दिखेगा तो वे उसके बारे में जानने के लिए आकर्षित होंगे। उनके बौद्धिक स्‍तर के हिसाब से ही उन्‍हें भिन्‍न भिन्‍न शहरों तथा पर्यटन स्‍थलों पर भेजा जाता है। ताकि वे क्रमिक रुप से सीख सकें। इस दौरान रामाभार स्‍तूप को देखकर रहे उत्‍साहित। पर्यटन के लिए कुशीनगर गए जीआर मांटेसरी के बच्चों में व्‍यापक उत्‍साह दिखाई दे रहा था। इस दौरान बच्‍चों ने सभी वास्‍तुकलाओं का भी काफी अध्‍ययन किया। बच्‍चो को सबसे अच्‍छा वहां का रामभार स्‍तूप लगा जो केवल ईंटो का बना हुआ था। यही नहीं भगवान बुद्ध की प्रतिमा भी उन्‍हें आकर्षित कर रही थी ।
जीआर एकेडमी के छात्र-छात्राओं की टोली पंहुची नेपाल के लुम्बिनी में जहां बुद्ध भगवान का जन्म हुआ था। यहां पर छत्राओं ने खूब मस्ती किया और यहां के इतिहास के बारे में जानकारी इकठ्टा किया। प्रबंधक प्रिन्स त्रिपाठी ने यहां तक ईतिहास बताते हुए सभी छात्र-छात्राओं ने खूब सेल्फी खिंचवाएं। उन्होंने बताया कि लुम्बिनी को भगवान बुद्ध के जन्म स्थान होने का गौरव प्राप्त है। हालांकि यह उससे पहले कोई ऐतिहासिक स्थान नहीं था। महात्मा गौतम बुद्ध के जन्म के कारण ही यह बौद्ध धर्मावलंबियों का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ स्थान बन गया। लुम्बिनी का महत्व महान अशोक सम्राट के समय से विदित है।बौद्ध धर्म में दीक्षित होने के बाद महान अशोक सम्राट ने गौतम बुद्ध के जन्म स्थान की यात्रा की थी। और यहां अनेक स्तूपों एवं विहारों का निर्माण कराया था। अपनी लुम्बिनी की यात्रा की स्मृति में उसने यहां एक अशोक स्तंभ भी स्थापित करवाया था। वर्तमान में ये सब स्मारक प्रकृति की हरितिमा से आवृत होकर भग्नावस्था में अतीत का गौरव छिपाये, हर साल अनेक बौद्ध भिक्षुओं, उपासकों, इतिहासकारों, पुरातात्विक विशेषज्ञों तथा पर्यटकों को खूब आकर्षित करते है।

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