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वर्ष 2025 तक मातृ मृत्‍यु दर कम करने के लक्ष्‍य को प्राप्‍त कर लेगा भारत

  • मातृ मृत्‍यु दर में आई है आधारभूत कमी, 1 लाख में 122 मातृ मृत्‍युदर
  • प्रदेश के 11 राज्‍यों ने वर्ष 2020 में ही प्राप्‍त कर लिया है इस लक्ष्‍य को

संतकबीरनगर, 1 मार्च 2020 ।
मुख्‍य चिकित्‍साधिकारी डॉ हरगोविन्‍द सिंह ने बताया कि भारत के मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) में एक वर्ष में 8 अंकों की कमी आई है। यह आंकड़ा एमएमआर पर भारत के रजिस्ट्रार जनरल के नवीनतम विशेष बुलेटिन का है। यह कमी इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि इसका अर्थ सालाना लगभग 2000 अतिरिक्त गर्भवती महिलाओं की जान बचना है। 2014-16 में 130 / लाख जीवित जन्म से घटकर 2015-17 में 122 / लाख जीवित जन्म एमएमआर हो गया है (6.2 प्रतिशत की कमी)। इसका अर्थ है कि भारत ने 2025 तक एमएमआर कम करने का सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) हासिल करने में प्रगति की है। इस तरह 2030 से पांच साल पहले यह लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।

डॉ हरगोविन्‍द सिंह, सीएमओ

राष्‍ट्रीय परिवार व स्‍वास्‍थ्‍य कल्‍याण मन्‍त्रालय के हवाले से जानकारी देते हुए डॉ हरगोविन्‍द सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत 2020 तक 100 / लाख जीवित जन्म के एमएमआर का महत्वाकांक्षी लक्ष्य 11 राज्यों ने हासिल कर लिया है। ये राज्य हैं केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, गुजरात, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और हरियाणा। नवीनतम एमएमआर बुलेटिन की एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों के लिए पहली बार एमएमआर स्वतंत्र रूप से प्रकाशित किए गए हैं। कुल सात राज्यों – कर्नाटक, महाराष्ट्र, केरल, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना ने एमएमआर में कमी दर्ज की है जो राष्ट्रीय औसत 6.2 प्रतिशत से अधिक या बराबर है। इस सफलता का मार्ग प्रशस्‍त करने वाले स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के विभिन्न कार्यक्रमों में आधारभूत परिवर्तन आया है।

आयुष्मान भारत हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर

आयुष्मान भारत (एबी) ‘सलेक्टिव एप्रोच से स्वास्थ्य सेवा से निरंतर स्वास्थ्य सेवा’ की ओर बढ़ने का प्रयास है जिसके तहत प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्तर हैं जिनमें बीमारी की रोकथाम, स्वास्थ्य संवर्धन, उपचार, पुनर्वास एवं दर्द निवारक सेवाएं शामिल हैं। आयुष्मान भारत हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर में खास कर महिलाओं के ओरल, सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर की रोकथाम की निःशुल्क स्क्रीनिंग की जाती है। अब तक ब्रेस्ट कैंसर के लिए 1.03 करोड़ से अधिक और सर्वाइकल कैंसर के लिए 69 लाख से अधिक महिलाओं की स्क्रीनिंग की गई है।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए)

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) ने जून, 2016 में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) शुरू किया। पीएमएसएमए के तहत पूरे देश की सभी गर्भवती महिलाओं को सुनिश्चित दिन, निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण प्रसव-पूर्व सेवाएं दी जाती हैं। अभियान के तहत हर महीने के 9 वें दिन लाभार्थियों को प्रसवपूर्व स्वास्थ्य सेवाओं (जांच और दवाएं शामिल) का एक न्यूनतम पैकेज प्रदान किया जा रहा है। इस अभियान में सरकारी केंद्रों पर स्वेच्छा से विशेषज्ञता सेवा प्रदान करने के लिए निजी क्षेत्र के स्वास्थ्य संगठन भी शामिल हैं। आज तक पीएमएसएमए के तहत प्रसव पूर्व देखभाल प्राप्त गर्भवती महिलाओं की कुल संख्या – 2.39 करोड़ से अधिक है। पीएमएसएमए स्वास्थ्य केंद्र में पहचान की गई ज्यादा जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की कुल संख्या – 12.5 लाख से अधिक है तथा पंजीकृत स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं की कुल संख्या – 6219

सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन)

इस पहल का लक्ष्य रोकथाम योग्य सभी मातृत्व एवं नवजात मृत्यु  को रोकने के उद्देश्य से सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र आने वाली हर महिला और नवजात शिशुओं के लिए सम्मान, आदर और गुणवत्ता के साथ निःशुल्क स्वास्थ्य सुनिश्चित करना; उन्हें स्वास्थ्य सेवा देने से मना करने के मामले को बिल्कुल स्वीकार नहीं करना है। यह मां और शिशु दोनों के लिए जन्म का सकारात्मक अनुभव प्रदान करता है।
भारत सरकार ने 10 अक्टूबर 2019 को सुमन की शुरुआत की। इस पहल का लक्ष्य रोकथाम योग्य सभी मातृत्व एवं नवजात मृत्यु और रोग रोकने और जन्म का बेहतर अनुभव देने के उद्देश्य से सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र आने वाली हर महिला और नवजात शिशुओं के लिए सम्मान, आदर और गुणवत्ता के साथ निःशुल्क स्वास्थ्य सुनिश्चित करना; उन्हें स्वास्थ्य सेवा देने से मना करने के मामले को बिल्कुल स्वीकार नहीं करना है। सुमन के तहत मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य की सभी मौजूदा योजनाओं को एक व्यापक दायरे में लाया गया है ताकि एक संपूर्ण और तालमेलपूर्ण प्रयास हो जो केवल स्वास्थ्य सेवा अधिकार देने की सीमा से बढ़े और अधिकार के उपयोग की गारंटी प्रदान करे।

मातृ शिशु स्‍वास्‍थ्‍य विंग्‍स ( एमसीएच विंग्‍स )

जिला अस्पतालों / जिला महिला अस्पतालों और ज्यादा मरीजों वाले उप-जिला स्वास्थ्य केंद्रों में भी अत्याधुनिक मातृत्व और बाल स्वास्थ्य विंग (एमसीएच विंग) के लिए स्वीकृति दी गई है। ये गुणवत्तापूर्ण प्रसूति और नवजात शिशु देखभाल के एकीकृत केंद्र होंगे। 650 मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग (एमसीएच विंग्स) के साथ 42000 से अधिक अतिरिक्त बिस्तरों के लिए स्वीकृति दी गई है।

दक्षता प्रशिक्षण कार्यक्रम

भारत सरकार ने 2015 में ‘दक्षता’ नामक राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया। यह स्वास्थ्य कर्मियों के कौशल के निर्माण के लिए एक रणनीतिक 3-दिवसीय प्रशिक्षण कैप्सूल है, जिसमें डॉक्टर, स्टाफ नर्स और एएनएम शामिल हैं, जिन्‍हें गुणवत्तापूर्ण देखभाल के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार अब तक 16,400 स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को दक्ष प्रशिक्षणों में प्रशिक्षित किया गया है।

मातृ मृत्यु निगरानी और कार्यवाही (एमडीएसआर)

एमडीएसआर के तहत पूरे देश में मातृ मृत्यु समीक्षा को संस्थागत रूप दिया गया है जो स्वास्थ्य केंद्र और समुदाय दोनों में मृत्यु के न केवल चिकित्सा कारणों बल्कि सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक कारणों की पहचान करते हंै। साथ ही मृत्यु की वजह बनने वाली व्यवस्थाजन्य कमियों को भी सामने रखते हैं। इसका लक्ष्य उचित स्तरों पर सुधार करना और प्रसूति स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता बढ़ाना है। राज्यों में एमडीएसआर और एमएनएम लागू करने में हुई प्रगति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई)

प्रसव और प्रसव के बाद देखभाल के साथ नकद की मदद। गर्भवती महिलाएं जो प्रसव के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जाती हैं उन्हें स्वास्थ्य संस्थान में ही उनके हक की पूरी नकद सहायता राशि का एकमुश्त भुगतान किया जाता है। जेएसएसके प्रोग्राम के साथ इस प्रोग्राम को जोड़ देने से देश में अस्पताल में होने वाले प्रसव की दर में बहुत सुधार हुआ है। भारत में अस्पताल में प्रसव (एनएफएचएस 4) 2007-08 के 47 प्रतिशत से बढ़कर 2015-16 में 78.9 प्रतिशत से अधिक हो गया है। साथ ही, इस अवधि में सुरक्षित प्रसव 52.7 प्रतिशत से बढ़कर 81.4 प्रतिशत हो गया है। पिछले कुछ वित्तीय वर्षों में जेएसवाई लाभार्थियों की संख्या बढ़ कर औसत एक करोड़ हो गई है जो 2005-06 में 7.39 लाख थी। राज्य / केंद्र शासित प्रदेशों ने चालू वित्त वर्ष 2019-20 (दिसंबर, 2019 तक) के लिए जेएसवाई लाभार्थियों की कुल संख्या कुल 75.7 लाख दर्ज की है।

जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेएसएसके)

इस पहल के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सभी गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव निःशुल्क है और अन्य खर्चे भी नहीं करने होंगे। यहां तक कि आपरेशन (सीजेरियेन) से शिशु को जन्म देना भी निःशुल्क है। उन्हें मुफ्त दवाएं, उपयोग हो जाने वाली वस्तुएं, भर्ती रहने के दौरान मुफ्त आहार, मुफ्त जांच और यदि जरूरत हो तो मुफ्त खून चढ़ाने की सुविधा भी दी जाएगी। इस पहल के तहत घर से अस्पताल आने, यदि रेफरल अस्पताल भेजा गया तो उसका परिवहन खर्च और वापस घर पहुंचने का परिवहन खर्च भी दिया जाता है। इस स्कीम का विस्तार कर प्रसव के दौरान और प्रसव के बाद की स्वास्थ्य समस्याओं और 1 वर्ष की उम्र तक के शिशुओं के उपचार का प्रावधान किया गया है।

‘लक्ष्य’ प्रोग्राम (लेबर रूम क्वालिटी इंप्रूवमेंट इनिशिएटिव)

इस प्रोग्राम का लक्ष्य लेबर रूम और मैटरनिटी ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में उपचार की गुणवत्ता सुधारना है। इससे रोकथाम योग्य मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर, बीमारी का खतरा और निर्जीव शिशु के जन्म की समस्या कम होगी जिसका संबंध लेबर रूम और मैटरनिटी ऑपरेशन थिएटर (ओटी) के उपचार से होता है। इससे सम्मानजनक मातृत्व स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित होगी।

लेबर रुम व आपरेशन थियेटरों की गुणवत्‍ता

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने लेबर रूम और मैटरनिटी ऑपरेशन थिएटरों में स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए दिसंबर 2017 में लक्ष्य प्रोग्राम की शुरुआत की। इससे गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान और प्रसव के तत्काल बाद सम्मानजनक और उच्च गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित होगी। इस उद्देश्य से 193 मेडिकल कॉलेजों के साथ कुल 2444 स्वास्थ्य केंद्र चुने गए। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार इस दिशा में उन्मुख हो गई हैं। 2419 स्वास्थ्य केंद्रों  (99 प्रतिशत) में आधारभूत आकलन का काम पूरा हो गया है। अब तक 506 लेबर रूम और 449 मैटरनिटी ऑपरेशन थिएटर संबद्ध राज्य से प्रमाणित हो गए हैं। राष्ट्र स्तर पर भी 188 लेबर रूम और 160 मैटरनिटी ऑपरेशन थिएटर ‘लक्ष्य’ प्रमाणित कर दिए हैं।

मिडवाइफरी सेवाओं की हुई शुरुआत

गर्भवती महिला और नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता बढ़ाने और उनकी सम्मानजनक देखभाल सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व नीतिगत निर्णय लेते हुए देश में मिडवाइफरी सेवाओं की शुरुआत की है। इस पहल का शुभारंभ दिसंबर 2018 में नई दिल्ली में पार्टनर्स फोरम के आयोजन में किया गया।‘मिडवाइफरी सर्विसेज इनिशिएटिव’ का लक्ष्य मिडवाइफरी का काम करने में दक्ष नर्सों का कैडर तैयार करना है जिन्हें इंटरनेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ मिडवाइव्स (आईसीएम) के निर्धारित दक्षता मानकों पर कार्य कुशल बनाया जाएगा। उन्हें लाभार्थी महिलाओं को केंद्र में रखते हुए सहानुभूति के साथ प्रजनन, मातृ और नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवा देने का ज्ञान दिया जाता है। तेलंगाना के फर्नांडीज अस्पताल स्थित राष्ट्रीय मिडवाइफरी प्रशिक्षण संस्थान में 6 नवंबर 2019 को मिडवाइफरी शिक्षक प्रशिक्षण के पहले बैच (पांच राज्यों से 30 प्रतिभागियों) की शुरुआत की गई।

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