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70 सालों से प्रधानमन्‍त्री राहत कोष के नाम पर देश से धोखाधड़ी करती रही कांग्रेस

  • सरकार किसी की भी रहे, कांग्रेस का राष्‍ट्रीय अध्यक्ष का होता है महत्‍वपूर्ण पद
  • देशवासियों की नहीं बल्कि मुसलमानों की मदद की जाती थी इस खजाने से
  • कोरोना आपदा के दौरान खुली पोल, मोदी ने बनाया PM-CARES

अरुण सिंह ।

देश के ओजस्‍वी गजलकार दुष्‍यन्‍त कुमार की दो लाइनों से अपनी बात शुरु करता हूं ….

न हो कमीज तो पैरों से पेट ढक लेंगे, ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफर के लिए ।।

कहां तो तय था चरांगा हर एक घर के लिए, कहीं चराग मयस्‍सर नहीं शहर के लिए ।

अरुण कुमार सिंह

ये लाइनें बरबस ही याद आ गईं कोरोना आपदा के समय बनाए गए नए फण्‍ड PM-CARES को लेकर चल रहे विवादों को लेकर। कोरोना की आपदा के समय देश के प्रधानमनत्री नरेन्‍द्र मोदी ने पीएम – केयर्स नामक एक फण्‍ड की स्‍थापना की है। उसी में दान देने की अपील भी की है। जबकि पिछले 70 साल से बने हुए प्रधानमन्‍त्री राष्‍ट्रीय राहत कोष में दान देने की अपील ही नहीं की गई। लोग इसी फण्‍ड में दान दे भी रहे हैं। इसी के बाद से कांग्रेस काफी बिलबिलाई हुई है। कांग्रेस के नेता और उसके पुछल्‍लों के साथ ही उसके सेवक मीडिया वाले भी इस नए राहत फण्‍ड पीएम केयर्स पर सवाल उठा रहे हैं। साथ में सेकुलर, कथित बुद्धिजीवी, लिबरल, कौमनष्‍ट तथा सम्‍प्रदाय विशेष के लोग। उनके बिलबिलाने पर भी प्रधानमन्‍त्री कार्यालय इसका जबाव नहीं दे रहे हैं। इसकी हकीकत क्‍या है यह जानकर आपको अपनी आखों पर विश्‍वास ही नहीं होगा। किस तरह से देश के बहुसंख्‍यकों के साथ 70 सालों से छल किया जाता रहा यह जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

फेसबुक पर तमाम लिबरल, सेकुलर, कौमनष्‍ट यह सवाल उठा रहे थे कि जब देश में प्रधानमन्‍त्री राहत कोष था। तब प्रधानमन्‍त्री नरेन्‍द्र मोदी ने पीएम केयर्स नाम के नए फण्‍ड की स्‍थापना आखिर क्‍यों की। क्‍या यह फण्‍ड विधायकों की खरीद फरोख्‍त के लिए बनाया गया है। तरह तरह के सवालों की बौछार चल रही है। इसकी छानबीन मैने भी शुरु की कि आखिर यह क्‍या बला है। कहीं सेकुलर, लिबरल और कौमनष्‍ट सही तो नहीं कह रहे हैं।

क्या है PM-CARES और PMNRF? जानिए दोनों के बीच की समानताएं और अंतर

प्रधानमंत्री राहत कोष के बारे में एक बात गौर करने वाली है कि यह संसद द्वारा गठित नहीं किया गया है। विभाजन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि विस्थापितों के मदद के लिए सरकार प्रयास कर रही है परंतु यह पर्याप्त नहीं है और इसीलिए इनकी मदद के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। इसी के तहत एक राष्ट्रीय कोष की स्थापना की गई। खास बात यह भी है कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष का गठन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था हालांकि इसके प्रबंध समिति ने हमेशा कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष को शामिल किया गया है। हम यह बताते हैं कि जब फंड को बनाया गया था तो कौन-कौन से लोग इसके प्रबंध समिति में शामिल थे। इनकी सूची देखकर आपको हकीकत खुद ब खुद पता चल जाएगी।

i) प्रधान मंत्री

ii) भारत की राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष आजीवन

iii) उप प्रधान मंत्री।

iv) वित्त मंत्री।

v) टाटा ट्रस्टीज़ का एक प्रतिनिधि।

vi) फिक्की द्वारा चुने जाने वाले उद्योग और वाणिज्य का प्रतिनिधि।

 अब बात PM-CARES की करते हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए सार्वजनिक योगदान के लिए PM-CARES फंड का गठन किया है। इसके तहत मिलने वाले दान को कोरोना वायरस से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इस फंड के अन्य सदस्यों में रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री को शामिल किया गया है। इसके अलावा विज्ञान, स्वास्थ्य, कानून और सार्वजनिक क्षेत्रों में अच्छे काम करने वाले लोगों को भी इसके सदस्य के रूप में नियुक्ति की गई है। इस फंड के गठन के साथ ही प्रसिद्ध हस्तियों के साथ-साथ आम लोगों ने भी लाखों की संख्या में अपने योगदान किए हैं। हालांकि एक सवाल बार-बार उठता रहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष होने के बावजूद भी पीएम के अंत की शुरुआत क्यों की गई? एक पत्रिका ने दावा किया है कि पीएम के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की तुलना में अधिक लोकतांत्रिक है। अतः यह कहना भी गलत नहीं होगा कि PM-CARES प्रधानमंत्री राहत कोष की तुलना में अधिक पारदर्शी है। PM-CARES में सलाहकार बोर्ड की स्थापना का भी प्रावधान है जिसमें चिकित्सा व्यवसाई और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों, शिक्षाविदों, अर्थशास्त्रियों और वकीलों को रखा जा सकता है। PM-CARES को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस जहां इसे पारदर्शी नहीं बता रही है वहीं भाजपा का कहना है कि कांग्रेस इससे इसलिए नाखुश है क्योंकि इसमें कांग्रेस अध्यक्ष के लिए कोई जगह नहीं है।

 प्रधानमनत्री राहत कोष के नाम पर क्‍या होता था खेल

प्रधानमन्‍त्री राहत कोष के नाम पर क्‍या खेल होता था यह भी कम आश्‍चर्यजनक नहीं है। इस कोष का इस्‍तेमाल पहली बार देश के दूरदर्शी प्रधानमन्‍त्री जवाहर लाल नेहरु ने भारत विभाजन के समय टूटी हुई मस्जिदों, मुसलमानों के घरों, मदरसों के जीर्णोद्धार के लिए किया था। तय तो यह था कि इससे विस्‍थापित होकर आने वाले हिन्‍दू परिवारों को बसाया जाएगा। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुई। जब तब बैठकें करके इस फण्‍ड से धन निकाला जाता था और जम्‍मू काश्‍मीर के जेहादियों के उत्‍थान के लिए दिया जाता था। मुस्लिम बाहुल्‍य क्षेत्रों में कथित प्रलय और बाढ़ का बहाना बनाकर मुस्लिमों को यह धन आपदा के नाम पर दिया जाता था। उन्‍हीं का उत्‍थान इस धन से किया जाता था। सरकार किसी की भी रहती थी, उस कमेटी में रहने वाला स्‍थायी सदस्‍य कांग्रेस का राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष होता था। अपने हितों में वह धन देता था। जिस समय कश्‍मीर में बाढ़ नहीं आती थी। आसाम में प्रलय नहीं होता था। केरल में सूखा नहीं पड़ता था। पश्चिम बंगाल और नागालैण्‍ड में भूकम्‍प नहीं आता था। उस समय भी यह धन वहां के मुस्लिम बाहुल्‍य क्षेत्रों के हितों के लिए निकाला जाता था और उन्‍हें दे दिया जाता था। जेहादियों के पुनर्वास और उनके लिए कालोनिया बनाने के लिए यह धन निकाला जाता था और इस धन से उन्‍हें मजबूती प्रदान की जाती थी। लेकिन खेल अब खुला है।

इसलिए आनन फानन में PM-CARES बनाना पड़ा। लोग दान भी दे रहे हैं, और उस धन का उपयोग भी हो रहा है। देश हित में, राष्‍ट्रहित में और सर्वजन के उत्‍थान में । दान दीजिए लेकिन ध्‍यान रहे PM-CARES में ही दें।

 

 

 

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