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हौसले की बदौलत उंचाइयों पर पहुंचे , लेकिन जमीन पर ही टिके रहे ‘प्रताप’ के पांव ( देवीलाल गुप्‍त की रिपोर्ट )

  • जब भी विपदा में पड़ी संतकबीर की धरती, मदद के लिए उठे डॉ उदय प्रताप चतुर्वेदी के हाथ
  • कोरोना आपदा के दौरान पीडि़त मानवता की सहायता के लिए निरन्‍तर कर रहे हैं प्रयास

संतकबीरनगर, न्‍यूज केबीएन।

एक शायर ने कहा है कि ..

नजर नजर में उतरना कमाल होता है,

नफस नफस में बिखरना कमाल होता है।

बुलन्दियों पे पहुंचना कोई कमाल नहीं,

बुलन्दियों पे ठहरना कमाल होता है।।

शायर की ये पंक्तियां महान सूफी संत कबीर की धरती के युवा समाजसेवी व अपने पिता पं सूर्यनारायण चतुर्वेदी के द्वारा जलाई गई शिक्षा की ज्‍योति को निरन्‍तर जलाने के लिए तत्‍पर सूर्या इण्‍टरनेशनल एकेडमी के निदेशक व दर्जनों शिक्षण संस्‍थाओं के प्रबन्‍धक डॉ उदय प्रताप चतुर्वेदी के उपर खूब फबती हैं। पीडि़त मानवता की सेवा के लिए निरन्‍तर तत्‍पर रहने वाले डॉ उदय प्रताप चतुर्वेदी आज कोरोना की आपदा में संतकबीर की धरती को अभिसिंचित किए हुए हैं। वह भी अपने पांवों को जमीन पर टिकाए हुए।

डॉ उदय प्रताप चतुर्वेदी, समाजसेवी

पूर्वांचल में एक बेहतर हैसियत के स्‍वामी डॉ उदय प्रताप चतुर्वेदी आज भी अपनी सरलता और विचारों की दृढ़ता के लिए जाने जाते हैं। संघर्षों की बदौलत एक बेहतर मुकाम बनाने वाले डॉ उदय प्रताप चतुर्वेदी ने हमेशा अपने साथ रहने वाले पुराने लोगों को याद किया। अपनी जड़ों को नहीं भूले , उन्‍हीं के साथ वे निरन्‍तर बने रहे। कोई कितनी भी हैसियत वाला क्‍यों न उनके साथ हो, अपने पुराने सहयोगियों को कभी भूले नहीं। उन लोगों को जो जमीन के उनके साथी थे। न ही अपनी जमीन भूले। क्‍योंकि वे थोड़ी सी सफलता पा जाने पर गुब्‍बारे की तरह से न तो फूलने वाले हैं, और न ही किसी विपदा में धीरज खोने वाले हैं। वे इस बात को मानते हैं कि जब आदमी जमीन को छोड़कर गगनबिहारी हो जाता है तो उसकी कोई कीमत नहीं रह जाती है। अपने पीछे बगैर किसी आभामण्‍डल के वे निरन्‍तर पीडि़त मानवता व गरीब जनता की सेवा में निरन्‍तर लगे हुए हैं। कोविड की आपदा के दौरान उन्‍होने पूरे जनपद के लोगों के लिए हेल्‍पलाइन जारी कर दी। हेल्‍प लाइन पर सम्‍पर्क करके लोगों को आर्थिक तथा अन्‍य तरह की सहायता करने का काम निरन्‍तर जारी है। बाहर से आने वाले प्रवासियों तथा कोरण्‍टाइन में रहने वाले युवाओं की सहायता अपनी टीम के साथ निरन्‍तर कर रहे हैं।

गरीबो, निर्बलों तथा आम जन को सहायता देने के साथ ही उन्‍होने नेपाल में आए भीषण भूकम्‍प, गोरखपुर में आई बाढ़ के साथ ही संतकबीरनगर के राप्‍ती और घाघरा के दियारा की बाढ़ की आपदा में लोगों को सहायता दी। जहां कहीं भी उन्‍हें नजर आता है कि उनकी सहायता से उनके जिले, उनके प्रदेश और देश का मान उंचा हो रहा है, किसी गरीब को नया जीवन मिल रहा है, तो वे सहायता के लिए तुरन्‍त ही आगे आ जाते हैं और बिना किसी भेदभाव व जाति व धर्म का ध्‍यान रखे बिना सहायता करते हैं। निरन्‍तर ही कुछ नया सोचने और करने वाले डॉ उदय प्रताप चतुर्वेदी तो हमेशा इसी बात पर विश्‍वास करते हैं कि ….

जिंदगी की असली उड़ान अभी बाकी है,

जिंदगी के कई इम्तिहान अभी बाकी है।

 अभी तो नापी से मुट्ठी भर जमीं हमने,

 अभी तो सारा आसमान बाकी है ।।

पिता पं सूर्यनारायण चतुर्वेदी की सीख हमेशा रहती है याद

डॉ उदय प्रताप चतुर्वेदी बताते हैं कि उनके पिता स्‍व. पं सूर्यनारायण चतुर्वेदी हमेशा कहा करते थे कि आप अगर साधन और सुविधा से सम्‍पन्‍न हैं और आपके क्षेत्र – प्रक्षेत्र में कोई दुखी है तो आपको हमेशा उसकी सहायता के लिए तैयार रहना चाहिए। पुराने लोगों ने कहा है कि दान देने से धन घटता नहीं है। अगर आपका धन मानवता की सेवा के लिए काम नहीं आता है तो वह धन मिट्टी के ढेले के समान है। उनके पिता की भी आदत थी कि कभी किसी के दुख के बारे में जान जाते थे तो उसकी हर तरह से सहायता करते थे। हम तो उन्‍हीं का अनुकरण कर रहे हैं। उनकी सीख आज भी मार्ग की बाधाओं को दूर करने के साथ ही लोगों की सहायता के लिए निरन्‍तर प्रेरित करती रहेगी।

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