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संतकबीरनगर में बिखरता जा रहा है समाजवादी कुनबा……

– अन्‍य राजनैतिक दल चुनाव प्रचार में जुटे, सपा कार्यकर्ता चर्चाओं में

– अचानक हुए उलटफेर के चलते काफी खराब हो गई पार्टी की हालत

संतकबीरनगर। अरुण सिंह

अरुण सिंह

जिले में जहां विभिन्‍न पार्टियों के कार्यकर्ता अपने प्रत्‍याशियों के चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं। वहीं अचानक हुए राजनैतिक उलटफेर के चलते समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता इन बातों की चर्चाओं में मशगूल हैं कि आखिर पार्टी ने टिकटों में इस तरह का उलटफेर क्‍यों किया। प्रत्‍याशियों के टिकट की टक्‍कर में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता पूरी तरह से बिखर गए हैं।

जिले की तीनों विधानसभाओं की स्थितियों पर नजर डालें तो खलीलाबाद विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता गोरखपुर जनपद की सीमा से लेकर तप्‍पा उजियार तक समाजवादी पार्टी के प्रत्‍याशी व पूर्व सांसद भालचन्‍द यादव के पुत्र सुबोध चन्‍द्र यादव के प्रचार प्रसार में जुटे थे। पूरी टीम बनकर तैयार थी। सियासी लड़ाई के मैदान में पूरी तरह से बिसातें बिछाई जा चुकी थीं। लेकिन स्थिति यह आई कि अचानक यह टिकट जावेद अहमद को दे दिया गया। यह फेरबदल नामांकन प्रक्रिया के अन्तिम दिन हुआ। एक दिन पहले ही हुई इस फेरबदल से कार्यकर्ता काफी उहापोह की स्थिति में पहुंच गए हैं। मेंहदावल विधानसभा क्षेत्र की स्थिति यह है कि वहां से कार्यकर्ता पूर्व मन्‍त्री Newskbn, khalilabad, santkabirnagar,Mahuli. Dhanghta, Mehdawal, gorakhpur लक्ष्‍मीकान्‍त उर्फ पप्‍पू निषाद के पक्ष में जनसम्‍पर्क में जुटे हुए थे। नदी और निषादों के बाहुल्‍य वाले इस क्षेत्र में अच्‍छी खासी पकड़ रखने वाले पप्‍पू निषाद का टिकट भी नामांकन के अन्तिम दिन काट दिया गया। उनकी जगह जयराम पाण्‍डेय को टिकट दे दिया गया। इसके चलते भी वहां कार्यकर्ताओं के एक गुट में काफी निराशा का माहौल है। अन्तिम समय में हुए इस फेरबदल के बाद कार्यकर्ताओं में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। वे गुटों में बंटे दिखाई दे रहे हैं।

धनघटा विधानसभा क्षेत्र की स्थिति यह है कि भालचन्‍द यादव के पुत्र सुबोध चन्‍द यादव का टिकट कटने के बाद इस क्षेत्र के सपा कार्यकर्ता भी दो गुटों में बंटे नजर आ रहे हैं। यहां पर कार्यकर्ताओं का एक असंतुष्‍ट गुट पहले से ही काम कर रहा है।

फिलहाल जो भी हो घोषित प्रत्‍याशियों के सामने इस समय कई संकट खड़े हो गए हैं। वे पहले अपने कार्यकर्ताओं को समेटने के साथ ही साथ दल के असंतुष्‍ट लोगों को भी संतुष्‍ट करें। इसके साथ ही अपना चुनाव प्रचार भी करें। लेकिन इसके लिए अभी समय कम ही बचा हुआ है। पार्टी की यह रणनीति क्‍या गुल खिलाएगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन बिखरे समाजवादी कार्यकर्ता उलटफेर के संकेत दे रहे हैं।

 

पिता- पुत्र की लड़ाई ने भी डाला असर

पार्टी के केन्‍द्रीय नेतृत्‍व के बीच चली पिता और पुत्र की लड़ाई ने भी यहां के कार्यकर्ताओं के उपर काफी असर डाला था। इसे लेकर पार्टी के कार्यकर्ता पहले से ही बिखरे नजर आ रहे थे। इसी बीच पार्टी में टिकट को लेकर यह नया बवाल खड़ा हो गया।

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