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मोदी के शासन काल में मीडिया भी है खौफजदा : चिदम्‍बरम

मुंबई: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने रविवार को कहा कि न सिर्फ दलित और अल्पसंख्यक, बल्कि मीडिया भी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के शासनकाल में दबाव और खौफ के साए में जी रहा है। यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा, ‘‘दलित खौफ में जी रहे हैं, अल्पसंख्यक खौफ में जी रहे हैं, छात्र और विश्वविद्यालय खौफ में जी रहे हैं। मीडिया भी खौफ के साए में जी रहा है।’’ चिदंबरम ने कहा कि भाजपा के अलावा अन्य राजनीतिक पार्टियों की कवरेज के मामले में मीडिया बहुत तंगदिल हो गया है।

महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद चिदंबरम 21 फरवरी को होने वाले बीएमसी चुनावों के लिए कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में यहां प्रचार कर रहे हैं। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर बरसते हुए चिदंबरम ने कहा, ‘‘आजकल ज्यादातर चैनल जयजयकार करने वाले बन गए हैं। ज्यादातर अखबारों ने चुप्पी साध ली है। यह लोकतंत्र के लिए दुखद है।’’ बहरहाल, चिदंबरम ने राष्ट्रीय मीडिया से ज्यादा स्वतंत्र होने के लिए क्षेत्रीय मीडिया की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह सर्वविदित है कि मीडिया पर कई ‘‘प्रत्यक्ष और परोक्ष दबाव’’ डाले जा रहे हैं। उन्होंने एक न्यूज चैनल का उदाहरण देते हुए बताया कि चैनल के एक वरिष्ठ पत्रकार ने उनका इंटरव्यू किया था, लेकिन आखिरी वक्त में इसका प्रसारण रोक दिया गया। चिदंबरम ने कहा कि न तो वह और न ही पत्रकार जानते हैं कि वह इंटरव्यू प्रसारित क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘साफ तौर पर संदेश यह था कि अपनी हद में रहो। यदि ज्यादा आलोचना करोगे तो सरकार तुम पर नजर रख रही है। मुझे उम्मीद है कि मीडिया इस डर से उबरेगा। मीडिया अक्सर उपदेश देता रहता है कि किसी जीवंत लोकतंत्र में लोगों को अपने दिल की बात बोलनी चाहिए, लेकिन पहले मीडिया तो अपने दिल की बात बोले।’’

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