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भ्रष्टाचार खत्म करने का ‘आधार’…….

अश्विनी कुमार, सम्‍पादक पंजाब केशरी

केन्द्र सरकार ने कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सरकारी राशन की दुकानों से सब्सिडी पर राशन लेने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बना दिया है। खाद्य सुरक्षा कानून के तहत देश के 88 करोड़ लोगों को 5 किलो गेहूं और चावल प्रतिमाह 2 से 3 रुपए की कीमत में मिलता है। इस योजना पर सरकार को 1.4 लाख करोड़ खर्च करने पड़ते हैं। हाल ही में केन्द्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान ने डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए राज्य के खाद्यान्न मंत्रियों और सचिवों का सम्मेलन बुलाया था। इस बैठक में राज्य सरकारों ने जून तक सभी राशन दुकानों पर डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने का वादा किया था। सरकार ने लोगों को 30 जून तक का समय दिया है ताकि वह आधार कार्ड को राशन कार्डों के साथ जोड़ सके। लोगों की सुविधा और देश की अर्थव्यवस्था के लिए यह एक बड़ा सकारात्मक कदम है। इससे बहुत से फायदे होंगे। आधार नम्बर दर्ज करते समय यदि एक सदस्य का नाम दो राशन कार्ड में मिला तो एक परिवार का राशन कार्ड बंद कर दिया जाएगा। अगर दो अलग-अलग पतों पर राशन कार्ड बनवा रखे हैं, उनमें से भी एक रद्द कर दिया जाएगा। राशन दुकानदार आधार नम्बरों को पीओएस (प्वाइंट आफ सेल) मशीन के माध्यम से दर्ज कर डाटाबेस में अपलोड कर देंगे। इसके बाद फर्जीवाड़ा हो ही नहीं सकेगा। आधार नम्बरों के चलते राशन कार्डों की गड़बडिय़ां सामने आ जाएंगी। कई राज्यों में फर्जी राशन कार्डों के जरिये सरकारों को राजस्व का चूना लगाया जाता रहा है। उपभोक्ताओं के आधे राशन कार्ड तो दुकानदारों के पास पड़े रहते थे जिनमें एंट्री कर दुकानदार सस्ते राशन को बाजार में महंगे दामों पर बेच डालते थे। अब हजारों कार्ड संशोधित किए जाएंगे। अब सस्ता राशन चाहिए तो आधार दिखाना ही होगा।
गुजरात भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पूरी तरह कैशलेस बना दिया है। गुजरात ने तो 31 मार्च की समय सीमा से पहले ही 17,250 दुकानों पर आधार कार्ड से भुगतान करने की व्यवस्था को लागू कर दिया जो एक सराहनीय कदम है। गुजरात कैशलेस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार जल्द ही बस, रेल और हवाई टिकट भी कैशलेस तरीकों से खरीदने की व्यवस्था कर रही है। हमारे देश में वर्षों से जरूरी वस्तुएं आम आदमी तक कम दाम पर पहुंचाने के लिए कई तरह की सब्सिडी यानी छूट दी जा रही है। तेल, गैस, खाद्यान्न और उर्वरक पर सरकार सब्सिडी देती है। सब्सिडी देने का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर तबके तक जरूरी चीजें पहुंचाना है, लेकिन हकीकत यह है कि अच्छी खासी कमाई करने वाले भी इन चीजों पर सब्सिडी का फायदा उठाते रहे हैं।
सब्सिडी का जितना फायदा अमीरों ने भारत में उठाया है उतना किसी ने नहीं उठाया। सरकारी खजाने पर बोझ लगातार बढ़ता गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आम लोगों की जिन्दगी में बदलाव लाने के सुधारों का वायदा करते हुए कहा था कि सरकार सभी तरह की सब्सिडी खत्म नहीं करेगी लेकिन तर्कसंगत बनाएगी और गरीब व जरूरतमंदों को दी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बजट सत्र में राष्टï्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए बताया कि सब्सिडी में सरकारों को करोड़ों की बचत हुई है। एलपीजी सिलेंडर पर अमीर लोगों ने सब्सिडी छोड़ी, जिससे सरकार मालामाल हुई। उन्होंने पहले भी बताया था कि चंडीगढ़ शहर में शत-प्रतिशत घरों में गैस कनैक्शन हैं फिर भी वहां राशन दुकानदारों को कैरोसिन दिया जाता था। जांच करने के बाद पता चला कि कैरोसिन में तो घपला होता है। हमने कैरोसिन सब्सिडी के छिद्र भी बंद किए। इसी तरह सरकार को काफी राजस्व मिला। किसानों की सब्सिडी सीधे उनके खाते में जा रही है। संविधान के नीति निर्देशक सिद्घांतों के अन्तर्गत अनुच्छेद-47 में भी यह स्पष्टï है कि लोगों के पोषाहार के स्तर पर जीवन स्तर ऊंचा करने तथा लोगों के स्वास्थ्य में सुधार करने का कत्र्तव्य राज्य का है। राज्यों का भी यह प्राथमिक कत्र्तव्य है लेकिन हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार के चलते सब्सिडी का लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा था, इसलिए जरूरी था कि देश के राजस्व को हो रहे नुक्सान को रोकने के लिए घपलेबाजी बंद की जाए। कोई भी सरकार लगातार रियायतें देकर या खैरात में वस्तुएं बांट-बांट कर देश की अर्थव्यवस्था को नहीं चला सकती इसलिए उसे सब्सिडी को तर्कसंगत और लक्षित बनाना ही होगा। राज्य सरकारें और राजनीतिक दल सब्सिडी की सियासत में लगे रहते हैं। फलस्वरूप सरकारी खजाने खाली हो जाते हैं। आखिरकार सरकारें कर लगाकर ही खजाना भरती हैं। अब यह जरूरी है कि पूरे सिस्टम को पारदर्शी बनाया जाए ताकि भ्रष्टïाचार की गुंजाइश ही नहीं रहे। आधार कार्ड जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। कैशलेस व्यवस्था और आधार कार्ड भ्रष्टाचार को खत्म करने का एक बड़ा माध्यम है। देश बदल रहा है इसलिए हमें भी बदलना चाहिए।

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