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दिलचस्‍प नारों का सहारा ले रही हैं राजनैतिक पार्टियां

लखनऊ: मतदाताओं को लुभाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाने वाली राजनीतिक पार्टियां उत्तर प्रदेश राज्य विधानसभा के चुनाव में दिल ओ दिमाग पर छा जाने वाले दिलचस्प नारों का सहारा ले रही हैं। कांग्रेस और सपा ने अपने दोस्ताने को वोट की शक्ल में तब्दील करने के लिये युवाओं का पंसदीदा गाना ‘बेबी को बेस पसंद है’ का सहारा लिया है।

कांग्रेस-सपा गठबंधन का नया नारा ‘यूपी को यह साथ पसंद है’ इन दिनों गली, चौराहों और नुक्कड़ों में खूब लोकप्रिय हो रहा है। उधर, बहुजन समाज पार्टी (बसपा)ने  ‘अब बदलाव मजबूरी है, यूपी में बहनजी जरूरी है’ का नारा देकर यह संदेश देने की कोशिश है कि बसपा अध्यक्ष मायावती का शासन ही सूबे की दिशा और दशा संवार सकता है।
                 

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी ‘यूपी को यह साथ पसंद है’ के नारे को अपना हथियार बनाते हुये सपा-कांग्रेस गठबंधन पर निशाना साधा है। भाजपा का नारा ‘यूपी को ये सात पसंद हैं’ लिखे पोस्टरों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह,राजनाथ सिंह,उमा भारती,केशव प्रसाद मौर्य, योगी आदित्यनाथ और कलराज मिश्र को दर्शाया गया है।

इन नारों में राजनीतिक दल एक दूसरे पर कटाक्ष करने से भी नही चूक रहे हैं। भाजपा का नारा ‘कैसा विरोध कैसी लड़ाई, चोर चोर मौसेरे भाई।’ अखिलेश-राहुल की दोस्ती पर कुठाराघात करने के लिये काफी है। बसपा का नारा ‘सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय, झूठे वादों में ना आये’ भाजपा की ओर साफ इशारा कर रहा है। भाजपा के कुछ अन्य जुमले सूबे की सपा सरकार के पांच सालों के शासनकाल पर अंगुली उठा रहे हैं। ‘सरकार जाये पर कब्जा ना जाये’,‘गुंड़े सत्ता में भागीदार, नहीं चाहिए ऐसी सरकार’ ‘क्यों नहीं रुके बलात्कार, नहीं चाहिए ऐसी सरकार’ और ‘जिसने किये घोटाले हजार, नहीं चाहिये ऐसी सरकार’ जैसे सपा विरोधी जुमले भाजपा के पोस्टरों और बैनरों पर छाये हुये हैं।
                
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरों और स्लोगन को खूब शेयर किया जा रहा है। भाजपा सोशल मीडिया में हमेशा से सक्रिय रही है। युवाओं को लुभाने वाले नारे और जुमलों के प्रचार प्रसार से पार्टी तेजी से लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। आमतौर पर सोशल मीडिया के परहेज करने वाली बसपा इस चुनाव में प्रचार प्रसार के इस माध्यम के प्रति काफी मुखर है। ‘घर घर शिक्षा की मशाल अब, वो जलने वाली है, बहनजी आने वाली हैं, प्रदेश में खुशहाली अब छाने वाली है, बहनजी आने वाली है, सबकी सुरक्षा सबका विकास और अब बदलाव मजबूरी है, बहनजी जरूरी है। जैसे नारों को सोशल मीडिया में खूब लाइक मिल रहे हैं।

बसपा के प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर ने कहा ‘ज्यादा से ज्यादा लोगों में पहुंच बनाने का इंटरनेट सशक्त माध्यम है और यही कारण है कि पार्टी ने इसे अपनाया है जिसका भरपूर फायदा मिल रहा है। हम आगे भी इस माध्यम को अपनाने से नही चूकेंगे।’ कांग्रेस और सपा के गठबंधन से पहले कांग्रेस ने सपा सरकार को लपेटते हुये नारा दिया था ‘27 साल यूपी बेहाल।’ इस नारे को हथियार बनाकर खूब सुर्खियां बटोरी थी मगर बाद में दोनों ने नारे के प्रारूप को बदलते हुए  ‘साइकिल संग अब हाथ पसंद है, यूपी को यह साथ पसंद है’ नारा दिया और जनता ने इस बार भी इसे खूब सराहा।

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