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अखिलेश की गदहा कथा के जरिए उन्‍हीं पर मोदी ने किया पलटवार

– बोले कि देश के लिए गदहे की तरह काम करना मुझे पसन्‍द

– गदहा बिना किसी भेदभाव के काम करता है अखिलेश जी

लखनऊ । केबीएन न्‍यूज

प्रधानमन्‍त्री नरेन्‍द्र मोदी को परोक्ष रुप से गधा कहना प्रदेश के मुख्‍यमन्‍त्री अखिलेश यादव को काफी महंगा पड़ता नजर आ रहा है। बहराइच व बस्‍ती में की गई रैली में प्रधानमन्‍त्री नरेन्‍द्र मोदी ने उसी गदहे के जरिए अखिलेश पर जमकर निशाना साधा। साथ ही साथ उनको गदहे से प्रेरणा लेने की भी सलाह दे डाली। प्रधानमन्‍त्री ने 9 मिनट तक इस मामले में जमकर निशाना साधा।

प्रधानमन्‍त्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि अखिलेश जी गधे से डर गए। आपकी जातिवादी मानसिकता जानवरों में भी जातिवादी देखने लगी। आपकी सरकार इतनी एफिशिएंट है कि अगर किसी की भैंस खो जाए तो पूरी सरकार लग जाती है। लेकिन अखिलेश जी गधा भी प्रेरणा देता है। गधा अपने मालिक के प्रति वफादार होता है। वो कम से कम खर्च वाला होता है। गधा कितना भी थका हुआ हो, लेकिन अगर मालिक काम लेता है तो वो पूरा करके देता है। उसे इस बात की चिन्‍ता नहीं रहती है कि चाहे उसके उपर चूना लदा हो या फिर चीनी लदी हो। वह दोनों को समान रुप से ले जाता है।
प्रधानमन्‍त्री ने कहा कि सवा सौ करोड़ देशवासियों के लिए गधे से भी प्रेरणा लेकर काम करता हूं अखिलेश जी! और गधा उसकी पीठ पर चूना हो या चीनी हो, उसको फर्क नहीं पड़ता। ये तो करप्ट लोगों का काम है जो ये देखते हैं कि किस रंग की नोट टेबल पर आई है।
अपनी बात को जारी करते हुए उन्‍होने कहा कि गुजरात के लोगों से आपको नफरत है। महात्मा गांधी, सरदार पटेल और दयानंद सरस्वती यहीं से आते हैं। भगवान कृष्ण ने यहां से जाकर वहां बसना पसंद किया।

 

आपने जिन्हें गले लगाया, उन्होंने गधे पर डाक टिकट निकाला
मोदी ने कहा, ”आपने जिनको गले लगाया है उनकी जब सरकार थी, उसी यूपीए सरकार ने 2013 में इन्हीं गुजरात के गधों का डाक टिकट निकाला था। अखिलेश जी वो गधा कितना महत्वपूर्ण होगा? अब आपको समझ में आ गया होगा।” मोदी ने कहा, ”सब बड़े-बड़े लोग हमारे खिलाफ आ गए हैं। अखिलेश ने खुद माना है कि समझौता मजबूरी में किया गया है। कांग्रेस ओडिशा में हारी। आज महाराष्ट्र के नतीजे आ रहे हैं। वहां भी सूपड़ा साफ हो रहा है। अरे, आप ये क्यों नहीं समझते कि वो तो डूबे, तुम्हें भी ले डूबेंगे सनम। दो महीने पहले तक कांग्रेस कहती थी- 27 साल यूपी बेहाल लेकिन ये करने वाले और कहने वाले अब मिल गए हैं। अब यूपी का क्या होगा आप अंदाज लगा सकते हैं। चुनाव में आरोप-प्रत्यारोप होते हैं, ये स्वाभाविक है। हम आलोचना को प्यार से लेते हैं। लेकिन, मैं हैरान हूं, मोदी पर हमला करो चलता है, भाजपा पर हमला करो चलता है। लेकिन आप गधे पर हमला करते हो, मुझे ये समझ नहीं आ रहा है कि आप गधे से क्यों घबराते हो?”

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