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सुकमा नक्‍सली हमले में घायल जवान ने बताया : रेडियो सेट तक उठा ले गए नक्‍सली

रायपुरः छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिले सुकमा में सोमवार को नक्सलियों ने सीआरपीएफ जवानों पर हमला कर दिया जिसमें 25 जवान शहीद हो गए। 300 नक्सलियों ने घात लगाकर जवानों को निशाना बनाया। अचानक हुए इस हमले के कारण जवानों को संभलने का मौका नहीं मिला। यह नक्सली हमला सुरक्षाबलों पर पिछले 7 सालों में हुए तीन बड़े हमलों में से एक है। साल 2013 में हुए नक्सली हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोग मारे गए थे। घायल जवान शेर मोहम्मद हमले की पूरी कहानी बयां करते हुए बताया कि नक्सलियों ने गांववालों की आड़ में सीआरपीएफ की पेट्रोलिंग पार्टी पर फायरिंग की। जिसके चलते जवानों को हमले का जवाब देने में दिक्कत आई।नक्सलियों ने गांव वालों को जवानों की लोकेशन पता करने के लिए भेजा। गाय-भैंस चराने वाले बगल से निकले और 15 मिनट बाद शुरू हो गई फायरिंग शुरू हो गई, जो करीब 3 घंटे तक चली।

गांव वालों की आड़ में हमला
150 मीटर दूर जंगल में नक्सली पोजिशन लेकर बैठे हुए थे। चारों तरफ घना जंगल था जिसमें 10 फीट दूर देखना भी मुश्किल था। जब हम पर फायरिंग हुई, तो हमने नक्सलियों को भागते देखा। इसके बाद हमने भी जवाबी फायरिंग की।” शेर मोहम्मद ने बताया, “गांव वालों की पोशाक पहने लोग भी गोली चला रहे थे। महिलाएं भी गोलियां चला रही थीं। उनके पास एके-47, एसएलआर जैसे ऑटोमेटिक हथियार थे। ऐसे में हमारे सामने मुश्किल थी कि गांव वालों पर कैसे गोली चलाएं। हमने नक्सलियों पर निशाना लगाकर फायरिंग की।” “करीब 25-30 नक्सलियों को हमने पक्का मार गिराया है। 4-5 को तो मैंने ही मारा है।”

सीने में लगी गोली
जवान शेर मोहम्मद ने बताया कि उसके साथी “सौरव कुमार को कंधे पर गोली लगी थी। तभी हमें जानकारी दी गई कि मोबाइल बंकर के पास हेलिकॉप्टर आएगा, जहां से घायलों को रायपुर ले जाएंगे। मोहम्मद सौरव को लेकर जा रहा था। उसके सीने पर गोली मारी, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट होने की वजह से वह बच गया।” शेर मोहम्मद की मां ने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है कि देश के लिए उसने बदाहुरी दिखाई और दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया।

रेडियो सेट्स तक ले गए नक्सली
हमले करने के बाद नक्सली जवानों के रेडियो सेट्स तक लेकर चले गए, ताकि बचे हुए जवान मदद न मांग सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, “सीआरपीएफ जवानों की बहादुरी पर हमें फख्र है, उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।” वहीं इस हमले के बाद देशभर में लोगों का गुस्सा फूट रहा है। सभी एक ही सवाल कर रहे हैं कि आखिर कब तक हमारे जवान शहीद होते रहेंगे और हम दुख जताते  रहेंगे।

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