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मैं तो लहसुन प्‍याज भी नहीं खाता, आपसे कमजाेर नहीं हूं : योगी के इस जवाब पर चुप हो गए बूचडखानों की वकालत करने वाले

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रहस्योद्घाटन किया कि वह तो लहसुन-प्याज भी नहीं खाते। हुआ यूं कि योगी भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने उस क्षण का जिक्र किया जब उनसे बूचड़खाना चलाने वालों का एक प्रतिनिधिमंडल मुलाकात करने आया था।प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि गोश्त नहीं मिलने की वजह से खाने में आनंद नहीं आ रहा है। लोग कमजोरी महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह सुनते ही मुझे अटपटा लगा और मैंने तपाक से कहा मैं तो लहसुन-प्याज भी नहीं खाता तो क्या हम आपसे कमजोर हैं। हमारे ज्यादातर मंत्री शाकाहारी हैं और सुबह 7 से रात 1 बजे तक काम करते हैं। वे क्या आप लोगों से कमजोर हैं। उच्चतम न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एन.जी.टी.) के निर्देशों के तहत ही बूचड़खाने चल पाएंगे। योगी ने कहा कि एन.जी.टी. ने 2014 में ही अवैध बूचड़खानों को बंद करने के लिए कहा था। उच्चतम न्यायालय ने इसी तरह का आदेश 2017 में दिया लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। दोनों संस्थाओं ने नियमावली भी तय कर दी थी। फिर भी अवैध बूचड़खाने बंद नहीं हुए।

उन्होंने कहा कि सरकार बनते ही मैंने अधिकारियों को बुलाया और कहा कि अवैध बूचड़खाने बंद होने चाहिए। अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने हाथ खड़े कर दिए। अधिकारियों का कहना था कि बूचड़खाने बंद कराने की कोशिश किए जाने पर पुलिस के साथ छुरेबाजी की जाती है। मैंने अधिकारियों को समझाया, सत्ता बदल गई है अब छुरेबाजी नहीं होगी। इसके बाद अवैध बूचड़खाने तेजी से बंद हुए। कुछ बचे हुए हैं वे भी जल्द ही बंद होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन के चेहरे बदले हैं लेकिन प्रशासन वही है। अवैध बूचड़खानों को बंद करने की कोशिश मात्र से अधिकारियों की पिटाई हो जाती थी लेकिन अब प्रशासन के लोग भी सुरक्षित हैं। पहले सत्ता का संरक्षण पाकर लोग अराजकता फैलाते थे।

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