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बूंद – बूंद पानी के लिए तरस रहा है बुन्‍देलखण्‍ड, पशु पक्षी भी तरस रहे पानी के लिए

बांदा: भीषण गर्मी से झुलसते उत्तर प्रदेश में बुन्देलखण्ड के बांदा में पानी की एक एक बूंद के लिये लोगों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। शरीर को झुलसाने वाली लू और धूप से सैकड़ों लोग बीमार हो चुके हैं वहीं वर्षा ऋतु में बाढ़ से तबाही मचाने वाली केन, बागेन और यमुना जैसी विशाल नदियां सिमटकर अपना मूल स्वरूप समाप्त करती जा रही है। इस वर्ष अप्रैल के आखिरी सप्ताह में ही यहां तापमान 45 डिग्री को पार कर चुका है। कुंए, तालाब, चेकडैम, नाले, पोखर या तो सूख चुके हैं या फिर सूखने के कगार पर पहुंच चुके हैं।

पशु पक्षी और मानव के सामने पेयजल संकट 
इस वर्ष मार्च से ही शुरू गर्मी के कारण जल संचयन और जलापूर्ति की योजनायें भी साथ छोड़ती जा रही हैं जिससे पशु पक्षी और मानव के सामने पेयजल संकट खतरा बढ़ता जा रहा है। करीब तीन लाख अन्ना मवेशी पेयजल ठिकानों को खोजते फिर रहे हैं। इन्सान वर्तमान और भविष्य के लिए चिन्तित है। केन, बागेन का जल प्रवाह कम हो गया है और जलधारा पतली हो गयी है। वहीं यमुना की बीच जलधारा में बालू के चट्टे निकलना शुरू हैं और कहीं-कहीं यमुना बालू के चट्टों के कारण पतली होकर दो भागो में बंट गयी है। बांदा जिले में लू और धूप से कई लोगों समेत पशु पक्षी भी शिकार हो चुके है। बडी संख्‍या में गर्मी से पीड़ित लोगों का उपचार चल रहा है।

पेयजल मुहैया कराने के लिए 363 टैंकर उपलब्ध कराए गए- मुख्य विकास अधिकारी
मुख्य विकास अधिकारी रामकुमार सिंह ने बताया कि गत वर्ष हुई भारी वर्षा के बाद लगभग पांच मीटर तक भूगर्भ के जलस्तर मे वृद्धि होने से फिलहाल जलस्तर अभी ठीक है जिससे हालात नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि जिले में 74 ग्रामीण पेयजल योजनाओं में 33 जल निगम, 22 जल संस्थान और 29 ग्राम पंचायतों द्वारा जलापूर्ति व्यवस्था की जा रही है। 471 ग्राम पंचायतों में तत्काल पेयजल मुहैया कराने के लिए 363 टैंकर उपलब्ध करा दिये गये हैं।

235 हैण्डपंपों का रिबोर कराया जा रहा
रामकुमार सिंह ने कहा कि जिले के बीस हजार हैण्डपंपों का रखरखाव ठीक से करने के आदेश दिये गये हैं और खराब 235 हैण्डपंपों का रिबोर कराया जा रहा है। खराब हैण्डपंपों का सर्वे जारी है और ग्रामीण इलाकों में 149 हैण्डपंप जल निगम द्वारा लगाये जा रहे हैं। 628 राजकीय नलकूपों के कमाण्ड में आने वाले 106 तालाबों में 64 तालाब भरे जा चुके हैं। शेष सूखे तालाबो को भरने का सिलसिला जारी है। लिफ्ट कैनाल द्वारा सात तालाब और 168 बड़े गढ्ढे भरे गये हैं। एक मई से केन केनाल में पानी छोडऩे के बाद मई के प्रथम सप्ताह तक 400 सूखे तालाब नहरों द्वारा भर दिये जायेंगे। उन्होंने बताया कि प्रत्येक गांव में जल संरक्षण का एक काम किये जाने के आदेश जारी किये गये हैं। नये तालाब की खुदाई, पुराने तालाबों को खोदकर गहराई बढाने और खेतों में तालाब बनाने आदि कार्य भी मनरेगा योजना से कराया जा रहा है। जिले में कुंओ की भी मरम्‍मत करायी जा रही है।

पेयजल उपलब्ध कराने के आदेश
नगर में अनेकों स्थानों में पौशाला बनाकर जिले के प्रत्येक कार्यालय में वर्तमान पेयजल व्यवस्था के अतिरिक्त डहरी आदि भरवाकर पेयजल उपलब्ध कराने के आदेश दिये गये हैं। फिलहाल ऐसी व्यवस्था की गयी है कि कहीं किसी को पेयजल से परेशानी न हो। जल संस्थान के अधिशाषी अभियन्ता रतनलाल ने बताया कि जिले में पांच नलकूप, 142 हैण्डपंप फेल हो गये हैं। 44 नलकूपों, 1796 हैण्डपंपों, 15 ओवरहेड टैंक से फिलहाल नगरीय क्षेत्रों में जलापूर्ति जारी है। फिलहाल पानी की आवश्यकता 36.35 एम0एल0डी0 है जिसमें 6.3 एम0एल0डी0 पानी की कमी होने से जलापूर्ति 30.05 एम0एल0डी0 की हो रही है।

उन्होंने बताया कि बांदा शहर के मर्दननाका गायत्री नगर, मुक्तिधाम हरदौली घाट, दुर्गा बाजार आदि क्षेत्रों में टैंकरों से भी जलापूर्ति शुरू कर दी गयी है।  उन्होंने कहा कि अभी जमीन का जलस्तर से कोई समस्या नहीं है। हैण्डपम्‍पों के दुरूस्तीकरण का सिलसिला हमेशा जारी रहता है। नगर क्षेत्रों के लिए 50 टैंकर उपलब्ध हैं।

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