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पेट्रोल के बाद केरोसिन ( मिट्टी के तेल ) में धांधली की योगी सरकार ने खोली पोल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद सूबे में एक से बढ़कर एक भ्रष्टाचार का खुलासा हो रहा है। पहले पेट्रोल पंपों पर चिप लगाकर घटतौली का खुलासा होने के बाद अब मिट्टी के तेल (केरोसिन) की सप्लाई में भी धांधली का पर्दाफाश हुआ है। उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत इसका भंडाफोड़ किया है।

इस तरह होता था खेल
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमित पाठक ने आज यहां बताया कि केरोसिन की कालाबाजारी की सूचना पर एसटीएफ ने 3 मई को इण्डियन ऑयल, पनकी के गेट पर टैंकर को चिन्हित किया। इण्डियन ऑयल के अधिकारियों से यह पता कर लिया गया कि टैंकर को नवाबगंज, उन्नाव स्थित डीलर के गोदाम पर जाना है।

उन्होंने बताया कि उक्त वाहन डिपो से निकलकर यशोदानगर, कानपुर में चार मई तक रूका रहा जबकि टैंकर की इनवायस की डिटेल तीन मई को ही स्टाक रजिस्टर में अंकित कर दी गयी। सन्देह बढऩे पर एसटीएफ, कानपुर यूनिट की एक टीम भी बुला ली गयी। इस दौरान टैंकर यशोदानगर से चलकर बिल्कुल विपरीत दिशा में हमीरपुर की ओर बढऩे लगा, जिसे बिधुनू थाना से लगभग तीन किमी आगे रोक लिया गया।  दूसरी ओर एआरओ, उन्नाव और एसटीएफ टीम ने डीलर के गोदाम पर मौजूद उसके मैनेजर शिवशंकर से स्टॉक रजिस्टर लेकर देखा तो उसमें दिनांक 03 मई को गाड़ी की एन्ट्री के साथ-साथ 12000 लीटर केरोसिन की आमद दर्ज थी जबकि यह टैंकर एसटीएफ टीम द्वारा केरोसिन सहित उसी समय बिधुनू थाना क्षेत्र में पकड़ा जा चुका था। स्टॉक रजिस्टर में वही एन्वॉयस नंबर अंकित था, जो ड्राईवर के पास से मूलरूप में बरामद की गयी।

जांच कराकर होगी कार्रवाई
पाठक ने बताया कि इस मामले में पीडीएस सिस्टम के केरोसिन ऑयल के पूरे के पूरे टैंकर को कालाबाजारी के लिए अवैध रूप से बिक्री करने के संबंध में जिलाधिकारी, उन्नाव द्वारा जॉच कराकर अग्रिम कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने बताया कि जांच में पता चला कि ऑयल कंपनियां राज्य सरकार द्वारा त्रैमासिक डीलर कोटा लिस्ट के अनुसार केरोसिन निर्गत करते हैं। इसके लिए आवंटित डिपो पर डीलर अपने कोटे के अनुसार इण्डेन्ट तैयार कराता है और अपने अनुबन्धित ट्रांसपेार्टर की गाड़ी का नंबर ऑयल कंपनी डिपो को उपलब्ध करा देता है।

ऑटोमेटिक सिस्टम से डीलर को मिल जाता है पूरे विवरण का SMS
निर्धारित तिथि पर अधिकृत ऑयल टैंकर डिपो से केरोसिन लेकर जैसे ही निकलता है, ऑटोमेटिक सिस्टम द्वारा डीलर को पूरा विवरण एस.एम.एस. हो जाता है। डीलर उक्त केरोसिन को पूर्ति अधिकारी द्वारा प्राधिकृत अधिकारी की उपस्थिति मेें अपने स्टॉक में एन्ट्री करता है और सभी संबंधित स्टॉक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करते हैं। इसके बाद जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूची के अनुसार यह डीलर अपने क्षेत्र के कोटेदारों को निर्धारित मात्रा में केरोसिन निर्गत कर देता है।

खरीद बिक्री में बड़ा अंतर 
पाठक ने बताया कि यह भी जानकारी हुई कि डीलर को डिपो से केरोसिन वर्तमान समय में रू0 18.10 प्रति लीटर मिलता है और वह कोटेदार को रू0 18.94 प्रतिलीटर की दर से उपलब्ध कराता है। खुले बाजार में केरोसिन की कीमत लगभग 50 रुपये प्रति लीटर रहती है। दाम में इतना बड़ा अन्तर इस सिस्टम में सेंध लगाकर केरोसिन को ऊॅचे दामों पर बेचने का मुख्य कारण है।

डीलर तीन स्तर पर  कर रहे हैं गड़बडिय़ां
उन्होंने बताया कि अवैध रूप से पी0डी0एस0 सिस्टम का केरोसिन ऑयल बेचने के रैकेट के संबंध में पता चला कि डीलर तीन स्तर पर गड़बडिय़ां कर रहे हैं। पहला उन्हें ऑयल कंपनियों से मिलने वाले केरोसिन को 40 से 45 रुपये प्रति लीटर की दर से पूरा पूरा कालेबाजारी करने वालों को बेचना, दूसरा कूटरचित ढंग से उक्त कोटे को अपने स्टॉक में अंकित कर संबंधित सक्षम अधिकारियों का हस्ताक्षर प्राप्त करना और तीसरा डीलर से जुड़े कोटेदारों को उनके कोटे के एक हिस्से की पूर्ति और बदले 30 से 35 रूपये प्रति लीटर की दर से भुगतान कर देना शामिल है। इस प्रकार कोटेदार को लगभग 11 से 15 रुपये प्रति लीटर का अनुचित लाभ, डीलर को 21 से 25 रुपये प्रति लीटर का अनुचित लाभ मिल जाता है।

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