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1988 में नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने शुरु किया था अपना राजनैतिक सफर

– राष्‍ट्रीय स्‍तर के बालीवाल खिलाड़ी थे नसीमुद्दीन सिद्दीकी

– शुरुआती दौर में रेलवे के ठेकदार भी रहे, 91 में लड़े पहला चुनाव

लखनऊ । यूपी की सियासत केंद्र की राजनीति की नींव रखती है, जिसे और भी खास बनाते है इस सियासत के हुक्मरान। वो बड़े बड़े नेता जिनके नाम बड़े है साथ ही उनके किस्से भी। उनमें से एक नेता है  नसीमुद्दीन सिद्दीकी

जानिए अपने नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बारे में-

नसीमुद्दीन सिद्दीकी का जन्म मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के सेवरा गाँव में हुआ था।नसीमुद्दीन सिद्दीकी के पिता का नाम कमरुद्दीन था जो एक कि पेशे से किसान थे। नसीमुद्दीन का शुरुआत में खेलों की तरफ बड़ा झुकाव था। नसीमुद्दीन राष्ट्रीय स्तर पर वॉलीबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने शुरुआत में एक रेलवे ठेकेदार के रूप में काम किया।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी  का राजनीतिक सफर

वर्ष 1988 में नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपने राजनैतिक सफर की शुरुआत करते हुए बांदा नगर निगम के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। जिसके बाद इसी साल नसीमुद्दीन बसपा में शामिल हो गए और हर मौके पर पार्टी के प्रति अपनी वफादारी दिखाते रहे। जिसके बाद 1991 में उन्हें बसपा से विधायकी का टिकट मिला जिसमे उन्हें सफलता मिली। लेकिन दो साल बाद 1993 में हुए चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

जब नसीमुद्दीन सिद्दीकी बनें पहली बार कैबिनेट मंत्री

जब मायावती 1995 में पहली बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी तब नसीमुद्दीन को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इसके बाद 21 मार्च 1997 से 21 सितंबर 1997 तक मायावती की अल्पकालीन सरकार में मंत्री बने। वही 3 मई 2002 से 29 अगस्त 2003 तक एक साल के लिए कैबिनेट का हिस्सा रहे। इसके बाद 13 मई 2007 से 7 मार्च 2012 तक मायावती की पूर्णकालिक सरकार में मंत्री रहे। जिसके बाद मायावती जब-जब मुख्यमंत्री बनी, तब नसीमुद्दीन को पार्टी में कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया। वर्तमान में नसीमुददीन सिद्दकी बसपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं

नसीमुद्दीन सिद्दीकी का विवादों से नाता-

अभी हाल ही में नसीमुद्दीन सिद्दीकी को बीजेपी नेता दयाशंकर की पत्नी और बच्चों के खिलाफ अभद्र भाषा के प्रयोग के चलते काफी विरोध का सामना करना पड़ा था। दयाशंकर की पत्नी स्वाती सिंह ने उनके खिलाफ पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करवाया था। यूपी विधानसभा चुनाव -2017 को देखते हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपने बड़े पुत्र अफजल को चुनावी मैदान में उतारा है। अफजल को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनाव की कमान दी गयी है जो वहां पर मुस्लिम वोटों की लामबंदी करेंगे। इससे पहले अफजल 2014 में फतेहपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। इसके बाद वह अपने पिता के साथ पार्टी के अधिकांश कार्यक्रमों में नजर आ रहे हैं।

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