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आपने लिया है बैंक से लोन, तो यह खबर आपके लिए है उपयोगी

नई दिल्लीः अब कर्जे की रिकवरी के लिए बैंक 90 दिनों की प्रतीक्षा नहीं करेंगे। बैंक अब किसी अकाऊंट को नॉन-परफॉर्मिंग की कैटिगिरी में डालने से पहले कर्ज वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि बैंकिंग रूल्स में हाल के संशोधनों से बैंकों को डूबे हुए कर्ज की समस्या के जल्द समाधान में मदद मिलेगी।

आर.बी.आई. के नियमों के अनुसार, अगर किसी कर्ज की रकम की किस्त 90 दिनों से अधिक तक बकाया होती है तो वह नॉन-परफॉर्मिंग बन जाता है। अधिकारी ने कहा, ‘नए ऑर्डनेंस के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि बैंकरप्सी रूल्स के अनुसार डिफॉल्ट माना जाएगा, जिसका मतलब है कि अगर कर्ज के भुगतान में चूक होती है तो यह अगले दिन से डिफॉल्ट बन जाएगा।’

इस प्रावधान को पिछले सप्ताह के ऑर्डिनेंस के जरिए बैंकिंग रेग्युलेशन ऐक्ट में जोड़ा गया है, जिससे बैंक कर्ज वसूलने की कार्रवाई की पहले से योजना बना सकेंगे। देश में विशेषतौर पर सरकारी बैंक डूबे हुए कर्ज या बैड डेट की समस्या से जूझ रहे हैं। इससे उनकी फाइनैंशियल पोजिशन पर असर पड़ रहा है और उनकी कर्ज देने की क्षमता कम हो रही है। सरकार ने अब ऑर्डिनेंस के जरिए आर.बी.आई. को बैंकों को इस तरह के लोन अकाएंट्स के निपटारे का निर्देश देने की ताकत दी है।

सरकार का कहना है कि वह बैंकिंग सिस्टम में बैड लोन की समस्या का जल्द समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। अगर कोई ऐसा मामला होता है जिसमें बैंकों को किसी डिफॉल्ट करने वाली कंपनी से बकाया रकम की वसूली के लिए मैनेजमेंट में बदलाव सहित अन्य उपायों पर विचार करने की जरूरत लगती है, तो उन्हें इसके लिए 90 दिनों का इंतजार नहीं करना होगा। अधिकारी का कहना था कि ऐसा नहीं है कि बैंकों को 90 दिन के बाद ही पता चलेगा कि लोन अकाऊंट को लेकर स्थिति ठीक नहीं है।

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