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मोटरसाइकिल से मध्‍य प्रदेश जा रहे राहुल गांधी को किया गया गिरफ्तार

भोपाल: मध्यप्रदेश के गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह ने आज स्वीकार किया है कि मंगलवार को प्रदेश के मंदसौर जिला स्थित पिपलिया मंडी में किसानों के प्रदर्शन के दौरान पांच किसानों की मौत पुलिस फायरिंग से हुई है। इससे पहले पिछले दो दिनों से प्रदेश सरकार पुलिस फायरिंग से इनकार कर रही थी।  इस पुलिस फायरिंग में पांच किसानों की मौत होने के साथ-साथ छह अन्य किसान घायल भी हुए थे। एक जून से आंदोलनरत किसान अब मध्यप्रदेश सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई करने पर उतर आए हैं। बुधवार को कर्फ्यू के बावजूद मंदसौर जिले के कई हिस्सों में प्रदर्शनकारियों ने उग्र प्रदर्शन किया। किसानों के इस आंदोलन ने सरकार के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। मंदसौर के डीएम स्वतंत्र कुमार सिंह ने इस आंदोलन को लीडर लैस मूवमेंट का नाम दिया है। वहीं पुलिस ने राहुल गांधी को मन्‍दसौर जाते समय नीमच में गिरफ्तार कर लिया है।

 

बाइक से मंदसौर जा रहे राहुल
राहुल गांधी उदयपुर पहुंचने के बाद मारे गए किसानों के परिवार से मिलने के लिए बाइक से मंदसौर के लिए रवाना हो गए हैं क्योंकि प्रदेश पुलिस ने उन्हें अरेस्ट करने की पूरी तैयारी कर रखी थी। वह राजस्थान-मध्य प्रदेश सीमा स्थित निमोड़ा से अपनी सिक्योरिटी को चकमा देकर बाइक पर सवार होकर निकल गए लेकिन प्रशासन ने उन्हें निमच में ही हिरासत में ले लिया। उन्होंने कहा कि किसानों की इस बदहाली के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मुझे किसानों से मिलने नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने अमीरों का टैक्स माफ किया, किसानों का कर्ज माफ नहीं कर सकते।

बिलखते रहे बच्चे, उपद्रवी करते रहे बस में तोड़फोड़
आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लूटपाट, आगजनी, तोडफ़ोड़ एवं पथराव किया। पथराव में 12 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। आंदोलनकारियों ने कई बसों को आग के हवाले कर दिया। पहले उन्होंने बसों में तोड़फोड़ की। जब तोड़फोड़ की जा रही थी, तब बच्चे और महिलाएं बस के अंदर थीं। बस के अंदर बैठे बच्चे ये सब देख बिलखते रहे, लेकिन उपद्रवी उसमें तोड़फोड़ करते रहे। इंदौर-भोपाल मार्ग पर नेवरी फाटे के पास 12 वाहनों को आग लगा दी गई। पुलिस के आवासीय मकानों, 2 पुलिस थानों, कई ट्रकों, दुकानों एवं एक वेयर हाऊस को जला दिया गया।
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सीएम ने लगाया कांग्रेस पर आरोप
प्रदेश के मंदसौर, नीमच, रतलाम और उज्जैन जिले में इंटरनैट सेवाएं ठप्प हैं। 1100 दंगा रोधी पुलिस कर्मी मंदसौर भेजे गए हैं। घटना के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हिंसा को भड़काने में विपक्षी पार्टी कांग्रेस का हाथ है। हालांकि कांग्रेस ने इसका खंडन किया है। उज्जैन पुलिस रेंज के महानिरीक्षक वी. मधुकुमार ने बताया, ‘‘मंदसौर शहर और पिपलिया मंडी में कर्फ्यू बुधवार जारी रहा जबकि जिले के शेष थाना क्षेत्रों में धारा 144 लागू है।’’

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किसानों की ये हैं मांगें
किसान जमीन के बदले मुआवजे के लिए कोर्ट जाने का अधिकार देने, फसल पर आए खर्च का डेढ़ गुना दाम देने, किसानों पर दर्ज मुकद्दमे वापस लेने, कर्ज माफ करने और दूध खरीदी के दाम बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

कांग्रेस राज में 19 साल पहले हुआ था इस तरह का आंदोलन
इससे पहले मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई में 1998 में किसानों ने इस तरह का आंदोलन किया था। उस समय कांग्रेस सरकार थी। 12 जनवरी 1998 को प्रदर्शन के दौरान 18 लोगों की मौत हुई थी। मुलताई में उस वक्त किसान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आंदोलन हुआ था। किसान बाढ़ से हुई फसलों की बर्बादी के लिए 5000 रुपए प्रति हेक्टेयर मुआवजे और कर्ज माफी की मांग कर रहे थे।

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मंदसौर के एसपी-कलक्टर का ट्रांसफर
राज्य में हालात काबू में न होता देख मंदसौर के एसपी और कलक्टर का ट्रांसफर कर दिया गया है। अब ओपी श्रीवास्तव नए कलक्टर, जबकि मनोज सिंह एसपी होंगे।

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