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सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी ने माना डॉ धर्मदेव सिंह में ही है HRPG के प्राचार्य पद की पहली अर्हता

डॉ अजय कुमार पाण्‍डेय हैं डॉ धर्मदेव सिंह से जूनियर

– इसलिए प्राचार्य पद पर बनता है डॉ धर्मदेव सिंह का हक

-‍कुलपति प्रो रजनीकान्‍त पाण्‍डेय ने दिया अपना निर्णय

संतकबीरनगर। न्‍यूज केबीएन

एचआरपीजी कालेज खलीलाबाद में प्राचार्य प्रकरण को लेकर चल रहे विवाद का सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी ने पटाक्षेप कर दिया है। कुलपति ने अपना निर्णय देते हुए कालेज के वरिष्‍ठ शिक्षक डॉ धर्मदेव सिंह को कार्यवाहक प्राचार्य पद के लिए योग्‍य माना है। इसके साथ ही कहा है कि डॉ अजय कुमार पाण्‍डेय वरिष्‍ठता के क्रम में डॉ धर्मदेव सिंह से नीचे हैं इसलिए वे कार्यवाहक प्राचार्य नहीं हो सकते हैं।

डॉ डी डी सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, एचआरपीजी कालेज

एचआरपीजी कालेज के प्राचार्य डॉ अजय कुमार पाण्‍डेय का चयन वर्ष 2010 में प्राचार्य पद पर हुआ था। यह चयन विज्ञापन संख्‍या 39 के आधार पर हुआ था। इसके तहत सैकड़ो महावि़द्यालयों में कार्यवाहक प्राचार्यों का चयन हुआ था। सभी जगह नए व वरिष्‍ठ शिक्षकों को प्राचार्य बनाने का आदेश सर्वोच्‍च न्‍यायालय के द्वारा किया गया। कुछ महाविद्यालयों के प्राचार्यों प्रबन्‍धकों से अपनी सांठगांठ करके पद छोड़ने से मना कर दिया। वरिष्‍ठ शिक्षकों ने एक बार फिर सर्वोच्‍च न्‍यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने कुलपतियों को प्राचार्य पद के लिए अर्हता का निस्‍तारण करने के  लिए कहा। इसके बाद एचआरपीजी कालेज में प्राचार्य पद के लिए चल रहे विवाद में कुलपति प्रो.रजनीकान्‍त पाण्‍डेय ने अन्तिम निर्णय देते हुए वरिष्‍ठता सूची के आधार पर डॉ धर्मदेव सिंह को कार्यवाहक प्राचार्य बनाने पर अपनी मुहर लगा दी। लेकिन अभी तक प्रबन्‍धक ने डॉ अजय कुमार पाण्‍डेय को कार्यवाहक प्राचार्य पद से मुक्‍त नहीं किया है। यहां यह बता देना भी आवश्‍यक है कि प्राचार्य डॉ अजय कुमार पाण्‍डेय को पिछले कई महीनों से प्राचार्य का वेतन नहीं मिल रहा है। साथ ही जब तक वे प्राचार्य रहे हैं तब तक उन्‍हें मिले अतिरिक्‍त वेतन की रिकवरी का आदेश भी हो चुका है।

 

क्‍या है सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति का निर्णय

प्रो रजनीकान्‍त पाण्‍डेय, कुलपति

सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी, कपिलवस्‍तु सिद्धार्थनगर के कुलपति प्रो. रजनीकान्‍त पाण्‍डेय ने अपने निर्णय में लिखा है कि – पत्रावली में उपलब्‍ध अभिलेखों तथा डॉ रामाश्रय सिंह, डॉ अजय कुमार पाण्‍डेय तथा डॉ धर्मदेव सिंह द्वारा प्रस्‍तुत लिखित अभिकथनों, अर्हता सम्‍बन्‍धी अभिलेखों, साक्ष्‍यों, विधिक व्‍यवस्‍थाओं, विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग विनियमन 2010 तथा दीन दयाल उपाध्‍याय गोरखपुर विश्‍वविद्यालय गोरखपुर के परिनियमो ( जो सिद्धार्थ विश्‍वविद्यालय, कपिलवस्‍तु, सिद्धार्थनगर पर भी प्रभावी है ) में दी गई व्‍यवस्‍था के अनुसार डॉ धर्मदेव सिंह तथा डॉ अजय कुमार पाण्‍डेय दोनों प्राचार्य पद की निर्धारित अर्हता रखते हैं। परन्‍तु महाविद्यालय की वरिष्‍ठता सूची में डॉ धर्मदेव सिंह तीसरे स्‍थान पर होने के कारण डॉ अजय कुमार पाण्‍डेय से वरिष्‍ठ हैं। अत: प्राचार्य पद हेतु अर्हताधारी शिक्षकों में वरिष्‍ठतम डॉ धर्मदेव सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर वाणिज्‍य कार्यवाहक प्राचार्य हेतु अर्ह हैं। तद्नुसार प्रकण निस्‍तारित किया जाता है।

 

मैंने अपने स्‍तर से प्रकरण निस्‍तारित कर दिया है : कुलपति

इस सम्‍बन्‍ध में जब सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. रजनीकान्‍त पाण्‍डेय से दूरभाष पर वार्ता की गई तो उन्‍होने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मुझे प्रकरण निस्‍तारित करने के लिए निर्देश दिया था। उन निर्देशों के तहत प्रकरण को निस्‍तारित करते हुए मैने इसकी कापी कुलसचिव, क्षेत्रीय उच्‍च शिक्षा अधिकारी के साथ ही साथ अन्‍य समस्‍त सम्‍बन्धित को भेज दी है। अगर इस आदेश के अनुपालन में कहीं से कोई शिथिलता बरती जाती है। या इस सम्‍बन्‍ध में मुझे कोई प्रत्‍यावेदन प्राप्‍त होता है तो विश्‍वविद्यालय तदनुसार प्रशासनिक व अनुशासनिक कार्रवाई करने के लिए बाध्‍य होगा।

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