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मानस पाठ के बाद किया सहभोज, आने वालों को दिया आम का पौधा

– सहभोज के बहाने युवा व्‍यवसाई चौधरी भूपेन्‍द्र सिंह ने की बेहतर पहल

– श्रावण मास में पर्यावरण संरक्षण की बेहतर पहल से सबक लें सभी लोग

चुरेब, संतकबीरनगर। विकास उपाध्‍याय

जिले के युवा व्‍यवसाई चौधरी भूपेन्‍द्र सिंह ने लोगों को पर्यावरण से जोड़ने के लिए एक बेहतर पहल की है। श्रावण मास के पहले दिन उन्‍होने अपने प्रतिष्‍ठान पर श्रीरामचरितमानस का पाठ कराया। दूसरे दिन लोगों को सहभोज के लिए बुलाया और भोज में पहुंचे हर व्‍यक्ति को आम्रपाली आम का एक पौधा दिया ताकि वे लोग उसे अपने घरों में लगाकर पर्यावरण को संरक्षित करें।

पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को आम का पेड़ देते हुए चौधरी भूपेन्‍द्र सिंह

पुराणों और धर्मग्रंथों में भी वृक्षों की महिमा का गुणगान करते हुए एक वृक्ष को सौ पुत्रों के समान माना गया है। इसी तरह का एक अनोखा प्रयास चौधरी भूपेंद्र सिंह ने किया। भूपेंद्र सिंह का खलीलाबाद के नेशनल हाइवे संख्‍या 28 पर आनन्‍द रिजार्ट के नाम से एक ढाबा है। उस ढाबे को उन्‍होने धीरे धीरे विस्‍तृत स्‍वरुप दिया। लगातार कुछ नया करते रहने के आदी रहे चौधरी भूपेन्‍द्र सिंह ने इस बार श्रावण मास के पहले सोमवार को अपने गांव मनियरा के बगल में स्थित इस रिजार्ट पर  श्रीरामचरितमानस पाठ का आयोजन किया। जिसका 11 जुलाई की शाम को मानस पाठ के उपरान्‍त सहभोज की व्‍यवस्‍था थी। सहभोज में प्रसाद ग्रहण करने वाले सभी लोगों को चौधरी भूपेन्‍द्र सिंह ने एक – एक कलमी आम का पौधा दिया। इसके पीछे उनकी मंशा यह थी कि पर्यावरण का संरक्षण हो, लोगों को फलदार वृक्ष की सेवा का एक अवसर भी प्राप्‍त हो। उनके इस प्रयास की हर कोई सराहना करता नजर आ रहा है।

चौधरी भूपेन्‍द्र सिंह से आम का पेड़ प्राप्‍त करते हुए सहभोज में आए एक व्‍यक्ति

क्‍या कहते हैं चौधरी भूपेन्‍द्र सिंह

चौधरी भूपेन्‍द्र सिंह

इस नई पहल की शुरुआत करने वाले चौधरी भूपेन्‍द्र सिंह कहते हैं कि शुरु से ही मैं पर्यावरण के प्रति जागरुक रहा। यह प्रेरणा हमें अपने परिवार के बुजुर्गों से मिली। जब मैंने श्रीरामचरितमानस के आयोजन का विचार बनाया तो सोचा की हवन के लिये करीब 25 किलो आम की लकड़ी लगेगी। तभी मेरे मन ने कहा कि अगर मै इस प्रकृति से 25 किलो लकड़ी ले रहा हूँ तो क्यों ना कुछ ऐसा करूँ जिससे इस प्रकृति को कुछ दे सकूँ। इसी सोच से मैंने प्रसाद ग्रहण करने आये ज्यादातर लोगों को आम का पेड़ उपहार स्वरूप दिया है। ताकि वे उस पेड़ की सेवा करके अपनी आने वाली पीढि़यों को उपहार स्‍वरुप कुछ दे सकें।

शास्‍त्र के अनुसार भी श्रेष्‍ठ है वृक्षारोपण

यदि प्रकृति को ईश्वर का दूसरा रूप कहा जाए तो कदापि गलत नहीं होगा। पेड़ों पर प्रकृति निर्भर करती है। पेड़ लगाना प्रकृति का संरक्षण व संवर्धन है और प्रकृति का संरक्षण व संवर्धन ईश्वर की श्रेष्ठ आराधना है। शास्‍त्रों के अनुसार एक पीपल, एक बरगद, दस इमली, कैथ, बेल, आंवले और आम के तीन-तीन पेड़ लगाने से मनुष्य को कभी भी नरक का गमन नहीं करना पड़ेगा, अर्थात उसे कभी नरक में नहीं जाना पड़ेगा।

 

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