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सलीम ने नहीं ड्राइवर हर्ष देसाई ने 3 गोलियां खाकर बचाई थी अमरनाथ यात्रियों की जान

जम्‍मू काश्‍मीर ।लम्‍बी टीआरपी पाने के लिए जम्‍मू काश्‍मीर के मीडिया के साथ ही डिजाइनर पत्रकारों ने असली हीरो ड्राइवर हर्ष देसाई को किस तरह से नजरंदाज कर दिया इस बात की पोल खुलती नजर आ रही है। मीडिया के दोगलेपन की पोल खुल गयी है, मीडिया ने उसे हीरो नहीं बनाया जिसनें अपनी जान पर खेलकर 50 यात्रियों की जान बचाई थी बल्कि उसे हीरो बना दिया जिसको एक भी गोली नहीं लगी और जो साइड हीरो का रोल निभा रहा था मतलब बस का कंडक्टर था.

बस का कण्‍डक्‍टर सलीम खान व ड्राइवर हर्ष देसाई

आपको बता दें कि अमरनाथ यात्री बस पर जब आतंकियों ने हमला किया तो उस वक्त बस हर्ष देसाई चला रहे थे वही बस के मेन ड्राईवर थे, आतंकियों ने उनपर तीन गोलियां चलाईं लेकिन उन्होंने बस नहीं रोका. एक गुजराती अखबार के मुताबिक़, जब हर्ष देसाई बस चला रहे थे तो आतंकियों ने उन्हें ख़त्म करने की कोशिश की, आतंकी ड्राईवर हर्ष देसाई को ख़त्म करने के प्रयास में थे इसलिए उन्होने हर्ष देसाई पर फायरिंग कर दी फायरिंग में हर्ष देसाई को तीन गोलियां लगीं.

जब हर्ष देसाई को तीन गोलियां लग गयीं और उनकी तवियत खराब होने लगी तो उन्होने सहायक ड्राईवर सलीम के हाथों में स्टेयरिंग थमा दी और उसे बस लगातार चलाते रहने के लिए कहा. सलीम ने हर्ष देसाई की बात मानी और बस को चलाता रहा, उसनें पुलिस चेक पोस्ट पर जाकर बस रोक दी. हर्ष देसाई सलीम को बस की ड्राइविंग सीट पर बिठाकर गेट की तरफ आ गए, एक आतंकी बस में घुसने की कोशिश कर रहा था लेकिन हर्ष देसाई ने उसे धक्का देकर बाहर फेंक दिया. उन्होंने अपनी जान पर खेलकर और तीन गोलियां खाकर 50 लोगों की जान बचाई, अगर हर्ष देसाई बहादुरी ना दिखाते और तीन गोलियां खाकर भी बस को ना चलाते रहते तो सभी लोग मारे जाते.

यहाँ पर हर्ष देसाई को फिल्म का मेन हीरो बनाना चाहिए था जबकि सलीम को साइड हीरो बनाना था लेकिन हर्ष देसाई को इसलिए हीरो नहीं बनाया गया क्योंकि उनके नाम में मुस्लिम शब्द नहीं लगा था, उन्हें हीरो बनाने से मीडिया को TRP नहीं मिलती.

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