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सउदी अरब की दुकानों में अब भारतीय नहीं कर सकेंगे काम : जानें क्‍या है कारण

रियाद: सऊदी अरब विदेशी कामगारों के लिए करियाना दुकानों के दरवाजे बंद करने की तैयारी में है। इसका सर्वाधिक असर भारतीयों पर पडऩा तय है। कच्चे तेल के दामों में 70 फीसदी गिरावट से परेशान सऊदी अरब ने अपने नागरिकों को रोजगार मुहैया करवाने के लिए यह कदम उठाया है। इससे एक साल में 20,000 नागरिकों को रोजगार मिलेगा।

सऊदी अरब के श्रम एवं सामाजिक विकास मंत्रालय ने इसका मसौदा तैयार किया है जिसमें इस तरह के रोजगारों में 100 फीसदी स्थानीय नागरिक ही होंगे। करियाना दुकानों के अलावा दूध, ब्रैड जैसी आवश्यक वस्तुओं और उत्पादों से जुड़ी किसी भी दुकान में विदेशी लोग काम नहीं कर पाएंगे। भोजन और सॉफ्ट ड्रिंक की मोबाइल वैन्स में भी स्थानीय नागरिक ही होंगे। सऊदी गजट रिपोर्ट के अनुसार शूरा काऊंसिल ने श्रम मंत्रालय को रोजमर्रा के उत्पादों की आपूर्ति करने वाले स्टोर बंद करने को कहा है। इसकी बजाय बड़े पैमाने पर सऊदी अरब के नागरिकों को नौकरी देने वाले बड़े रिटेल ब्रांड स्टोरों को लाइसैंस देना शुरू किया है। सूत्रों का कहना है कि मोबाइल बिक्री, मुरम्मत जैसे काम भी स्थानीय नागरिकों के लिए सीमित कर 8000 नौकरियां दी जाएंगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी स्थानीय नागरिकों पर जोर
सऊदी अरब सरकार ने 2020 तक स्वास्थ्य क्षेत्र में 93 हजार स्थानीय नागरिकों को नौकरी देने का फैसला किया है। इसका असर भी विदेशी कामगारों पर पड़ेगा। हाल ही में 7500 सऊदी डाक्टरों, नर्सों और टैक्नीशियनों को नौकरी दी गई।

आंकड़ों में कामगार
95 लाख दक्षिण एशियाई देशों के कामगार खाड़ी देशों में
21 लाख भारतीय सऊदी अरब व 28 लाख यू.ए.ई. में कार्यरत
28 प्रतिशत बेरोजगारी दर है सऊदी अरब के 20 से 28 साल के युवकों में

परिवार रखना कठिन
1700 रुपए परिवार के हर शख्स को सऊदी अरब में रखने का टैक्स देना होगा।
दोगुना होगा हर साल परिवार के आश्रित पर टैक्स 2020 तक
10 प्रतिशत नौकरियां आरक्षित की गईं निताकत कानून 2015 के तहत
70 प्रतिशत कच्चे तेल में गिरावट से परेशान सरकार अपने नागरिकों को तवज्जो दे रही

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