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काश ! जय चौबे जैसे हो जाते सारे विधायक तो सुधर जाती प्रदेश की व्‍यवस्‍था

  • सम्‍पूर्ण समाधान दिवस के दौरान पहुंचकर आम जनता की समस्‍याओं के त्‍वरित निस्‍तारण के दिए निर्देश
  • अधिकारियों से बोले कि सम्‍पूर्ण समाधान दिवस पर आने वाला फरियादी दुबारा नहीं दिखना चाहिए कतार में

संतकबीरनगर। अरुण सिंह

वर्षों से चलाए जा रहे तहसील दिवस का नाम अब प्रदेश के मुखिया योगी आदित्‍यनाथ ने बदल दिया है। तहसील दिवस का नाम अब सम्‍पूर्ण समाधान दिवस रख दिया है। साथ ही साथ स्‍थानीय जनप्रतिनिधियों व उनके प्रतिनिधियों की भी इस सम्‍पूर्ण समाधान दिवस में भागीदारी तय कर दी गई है। नई व्‍यवस्‍था लागू होने पर सदर विधायक दिग्विजय नारायण चतुर्वेदी उर्फ जय चौबे सदर तहसील में आयोजित सम्‍पूर्ण समाधान दिवस में पहुंच गए। उन्‍होने वहां पर मौजूद रहकर न सिर्फ समस्‍या निस्‍तारण की स्थितियों को देखा। बल्कि जिले के उच्‍चाधिकारियों को तल्‍ख लहजे में यह निर्देश दिया कि शासन की मंशा के अनुरुप ही इस सम्‍पूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया जाए। खानापूर्ति कतई बर्दाश्‍त नहीं की जाएगी।

सम्‍पूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर खलीलाबाद तहसील में बैठे हुए सदर विधायक दिग्विजय नारायण चतुर्वेदी उर्फ जय चौबे

विधायक जय चौबे सदर तहसील में आयोजित सम्‍पूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर अचानक ही पहुंच गए। पहले वे बाहर मौजूद भीड़ से मिले और उनसे समस्‍याओं के निस्‍तारण की गति के बारे में जाना। बाहर मौजूद जनता ने उन्‍हें यह बताया कि कई तहसील दिवसों के चक्‍कर लगाने के बाद भी उनकी समस्‍याओं का निस्‍तारण नहीं होता है। कई लोग 2 तो कई लोग 4 तहसील दिवसों में आने और समस्‍या के निस्‍तारण न होने की बात कहने लगे। एक व्‍यक्ति तो कहने लगा कि वह 7 तहसील दिवसों से आ रहा है। लेकिन उसकी समस्‍या का निस्‍तारण नहीं हो रहा है। सारी समस्‍याओं को जानने के बाद सदर विधायक जय चौबे सम्‍पूर्ण समाधान दिवस के कार्यक्रम में पहुंचे। वहां पहुंचने के बाद उन्‍होने जिलाधिकारी मारकण्‍डेय शाही के साथ ही साथ पुलिस अधीक्षक हेमराज मीणा को तल्‍ख लहजे में यह निर्देश दिया कि यहां पर आने वाली जनता की समस्‍याओं का सम्‍पूर्ण समाधान होना चाहिए। प्रदेश के मुख्‍यमन्‍त्री योगी आदित्‍यनाथ जी की भी मंशा यही है। इसीलिए उन्‍होने इसका नाम बदलकर सम्‍पूर्ण समाधान दिवस रखा है। यहां तो स्थिति यह है कि को‍ई 4 तो कोई 7 तहसील दिवसों से अपनी समस्‍याओं का पिटारा लेकर घूम रहा है। समस्‍या के निस्‍तारण के नाम पर उसे सिर्फ आश्‍वासन की घुट्टियां पिलाई जा रही हैं। यह अब नहीं चलने वाला है। कोई भी व्‍यक्ति मात्र एक समाधान दिवस पर आएगा और उसकी समस्‍या का निस्‍तारण होना चाहिए। समस्‍या के निस्‍तारण में नौकरशाही और लालफीताशाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्‍त नहीं की जाएगी।

एक निर्बल फरियादी की समस्‍याओं को सुनते हुए एसपी हेमराृज मीणा

सभी अधिकारी यह कान खोलकर सुन लें कि उन्‍हें सम्‍पूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर आने वाली समस्‍याओं का निस्‍तारण कराना ही होगा। कोई भी फरियादी दुबारा सम्‍पूर्ण समाधान दिवस के दरवाजे पर फरियाद करते हुए नहीं दिखाई देना चाहिए। काश प्रदेश के सारे विधायक जय चौबे की तरह हो जाते तो जनता को आश्‍वासनों की घुट्टी दर घु‍ट्टी पिलाने  वाले इन अधिकारियों की कलई तो खुलती ही, साथ ही साथ फरियादियों की समस्‍याओं का तत्‍काल निवारण भी हो जाता।

 

आखिर कौन सी समस्‍या है जिसका निस्‍तारण नहीं हो सकता ?

सम्‍पूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर एक फरियादी का शिकायती पत्र खुद देखते हुए विधायक खलीलाबाद जय चौबे

जिले के उच्‍चाधिकारियों के सामने सदर विधायक जय चौबे ने यह सवाल रखा कि आखिर कौन सी वह समस्‍या है जिसका तत्‍काल निस्‍तारण नहीं हो सकता है। कोई ऐसी समस्‍या नहीं है जिसका निस्‍तारण एक पखवारे के अन्‍दर नहीं हो सकता है। तो फिर आखिर यह देरी क्‍यों की जाती है। सभी लोगों की जबावदेही तय होगी। मा. मुख्‍यमन्‍त्री जी ने तहसील दिवस का नाम सम्‍पूर्ण समाधान दिवस रखा है। इसका मतलब यह है कि आने वाले व्‍यक्ति की समस्‍या का पूरी तरह से समाधान हो जाना चाहिए। इस दिशा में अधिकारी काम करें। आज का काम कल पर न छोड़े। अगर किसी व्‍यक्ति की समस्‍या का समाधान एक सम्‍पूर्ण समाधान दिवस में नहीं होता है तो इसके लिए पूरी तौर पर जिलाधिकारी जिम्‍मेदार होंगे। चाहे वह समस्‍या किसी भी विभाग से जुड़ी क्‍यों न हो।

 

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