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वाल्मिकीनगर से आजमगढ़ तक फैला है चाइनीज पिस्‍टल का कारोबार

– आजमगढ़ पुलिस के वा‍ंछित की चाय की दुकान से चलता है चाइनीज पिस्‍टल का कारोबार

– कारोबारी चाय की दुकान पर ही करते हैं डीलिंग, इसके बाद होती है पिस्‍टल की सप्‍लाई

मोहन श्‍याम गौड़

वाल्मिकीनगर, पश्चिमी चम्‍पारण ( बिहार)।

बिहार राज्‍य के पश्चिमी चम्‍पारण जनपद के वाल्मिकीनगर से चलने वाले चाइनीज पिस्‍टल के कारोबार की जड़ें पूर्वी उत्‍तर प्रदेश के विभिन्‍न जनपदों के साथ ही बिहार राज्‍य के विभिन्‍न जिलों में फैली हुई हैं। आजमगढ़ पुलिस का वांछित अपराधी वाल्मिकीनगर में चाय की दुकान चलाता है। वही से पूरा कारोबार संचालित किया जाता है। सारी डीलिंग इसी चाय की दुकान पर काफी गोपनीय तरीके से होती है। चाय की चुस्कियों में डीलिंग होती है, उसके बाद माल की सप्‍लाई की जाती है।

चाइनीज पिस्‍टल के कारोबार के सरगना वाल्मिकीनगर के पांच भाइयों के शातिर गैंग का मुख्‍य सरगना दिन भर इस चाय की दुकान पर डीलिंग करता है। पांचवी कक्षा फेल कारोबार का यह सरगना थ्री आर डी पुल के पास नहर के किनारे स्थित एक चाय की दुकान पर बैठकर चाइनीज पिस्टल की तस्करी की नेटवर्किंग करता है। उक्‍त चाय की दुकान उसके एक खास दोस्त की है। उसका यह खास दोस्‍त उसका राजदार बताया जाता है। उक्त चाय वाला उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ का निवासी है। विश्‍वस्‍त सूत्रों की माने तो वह आजमगढ़ पुलिस का वांछित भी है। उसकी वाल्मिकीनगर में कोई पैतृक सम्पत्ति नहीं है। इसी वजह से वह थ्री आर डी पुल के पास नहर के किनारे सरकारी जमीन पर एसबेस्‍टस सीट का पक्का मकान बनाकर रहता है। इसे हटाने की हिम्मत विभागीय अधिकारी भी नहीं कर पाते है। इसी चाय वाले के सम्पर्क से उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के अपराधी टाइप लोग वाल्मिकीनगर तक चाइनीज पिस्टल की तलाश में आते रहते है। आजमगढ़ जिला उत्तर प्रदेश में अपराध के ग्राफ में नम्बर एक पर माना जाता है। इसके साथ ही वहां पर इन चाइनीज पिस्‍टलों की खपत भी वहां पर खूब होती है।

फिलहाल इसके सा‍थ ही और लोगों का नेटवर्क इस कारोबार को खूब रंग दे रहा है। काफी सावधानी से चलाए जाने वाले इस कारोबार की भनक पाने में गण्डक बैराज पर मौजूद सशस्त्र सीमा बल की इक्कीसवीं बटालियन के जवान और खुफिया तन्त्र चौबीसो घण्टे चौकस दिख रहे है। बावजूद इनको कोई सफलता नहीं मिलती है। फिलहाल समय की मांग है कि इस कारोबार पर नकेल कसने के लिए स्‍थानीय पुलिस के साथ ही साथ एसएसबी को भी काफी सतर्क दृष्टि रखनी होगी। अन्‍यथा यह कारोबार निरन्‍तर चलता रहेगा।

बाल्मिकीनगर के इसी बैराज के बगल में निकलने वाली नहर के बगल में स्थित चाय की दुकान से ही संचलित होता है चाइनीज पिस्‍टल का कारोबार

तड़ीपार अपराधी बने हैं चाइनीज पिस्‍टल के कैरियर

इन चाइनीज पिस्‍टलों के कारोबार से जुड़े लोगों में कैरियर का काम यूपी और बिहार के विभिन्‍न जनपदों से तड़ीपार अपराधी करते हैं। ये अपराधी अपने क्षेत्रों में ऐसे लोगों को खोजते हैं जिन्‍हें चाइनीज पिस्‍टल की चाह होती है। इसके बाद ये अपना कमीशन जोड़कर सौदेबाजी करते हैं। कुछ गिने चुने और विश्‍वासी लोगों को छोड़कर और किसी से ये सौदेबाजी भी नहीं करते हैं। जिसके चलते पिछले 15 सालों से इनका यह धन्‍धा निर्बाध रुप से चल रहा है।

 

दिन भर खेलते हैं कैरम, रात में करते हैं तस्‍करी

विश्‍वस्‍त सूत्रों की मानें तो आजमगढ़ के साथ ही साथ कुछ और जनपदों के तड़ीपार अपराधी वाल्मिकीनगर में सिर्फ इसलिये रहते है ताकि चाइनीज पिस्टल की तस्करी से मालामाल हो सके। यहां यह बता देना समीचीन होगा कि उनका यहॉ पर कोई और रोजी-रोजगार नहीं है। लेकिन वे वाल्मिकीनगर जमे रहते हैं। वे दिन भर थ्री आर डी मार्केट में हनुमान मन्दिर के सामने इकठ्ठे होकर कैरम खेलते देखे जा सकते है। रात में जब माल आ जाता है तो उसे लेकर अपने अपने क्षेत्र में निकल जाते हैं।

चाइनीज पिस्‍टल की तस्‍करी का पहला भाग पढ़ने के लिए नीचे का लाल बटन दबाएं…..

चाइनीज पिस्‍टल का कारोबार – भाग 1

शेष आगे की किश्‍तों में……. क्रमश:

 

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