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गजल

अकबर इलाहाबादी ( गजल ) – आँखें मुझे तल्वों से वो मलने नहीं देते, अरमान मेरे दिल का निकलने ….

आँखें मुझे तल्वों से वो मलने नहीं देते अरमान मेरे दिल का निकलने नहीं देते ख़ातिर से तेरी याद को टलने नहीं देते सच है कि हमीं दिल को संभलने नहीं देते किस नाज़ से कहते हैं वो झुंझला के शब-ए-वस्ल तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते परवानों ने फ़ानूस को देखा तो ये बोले क्यों हम को ...

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अकबर इलाहाबादी ( गजल ) – समझे वही इसको जो हो दीवाना किसी का ……

समझे वही इसको जो हो दीवाना किसी का ‘अकबर’ ये ग़ज़ल मेरी है अफ़साना किसी का गर शैख़-ओ-बहरमन सुनें अफ़साना किसी का माबद न रहे काबा-ओ-बुतख़ाना किसी का अल्लाह ने दी है जो तुम्हे चाँद-सी सूरत रौशन भी करो जाके सियहख़ाना किसी का अश्क आँखों में आ जाएँ एवज़ नींद के साहब ऐसा भी किसी शब सुनो अफ़साना किसी का ...

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अकबर इलाहाबादी ( गजल ) – दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ ……

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार1 नहीं हूँ बाज़ार से गुज़रा हूँ, ख़रीददार नहीं हूँ ज़िन्दा हूँ मगर ज़ीस्त2 की लज़्ज़त3 नहीं बाक़ी हर चंद कि हूँ होश में, होशियार नहीं हूँ इस ख़ाना-ए-हस्त4 से गुज़र जाऊँगा बेलौस5 साया हूँ फ़क़्त6, नक़्श7 बेदीवार नहीं हूँ अफ़सुर्दा8 हूँ इबारत9 से, दवा की नहीं हाजित10 गम़ का मुझे ये जो’फ़11 है, बीमार ...

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अकबर इलाहाबादी ( गजल ) – दिल मेरा जिस से बहलता कोई ऐसा न मिला

दिल मेरा जिस से बहलता कोई ऐसा न मिला बुत के बंदे तो मिले अल्लाह का बंदा न मिला बज़्म-ए-याराँ से फिरी बाद-ए-बहारी मायूस एक सर भी उसे आमादा-ए-सौदा न मिला गुल के ख्व़ाहाँ तो नज़र आए बहुत इत्रफ़रोश तालिब-ए-ज़मज़म-ए-बुलबुल-ए-शैदा न मिला वाह क्या राह दिखाई हमें मुर्शिद ने कर दिया काबे को गुम और कलीसा न मिला सय्यद उठे ...

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अकबर इलाहाबादी ( गजल ) – बहसें फिजूल थीं यह खुला हाल देर में……

बहसें फिजूल थीं यह खुला हाल देर में अफ्सोस उम्र कट गई लफ़्ज़ों के फेर में है मुल्क इधर तो कहत जहद, उस तरफ यह वाज़ कुश्ते वह खा के पेट भरे पांच सेर मे हैं गश में शेख देख के हुस्ने-मिस-फिरंग बच भी गये तो होश उन्हें आएगा देर में छूटा अगर मैं गर्दिशे तस्बीह से तो क्या अब ...

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अकबर इलाहाबादी ( गजल ) – कोई हँस रहा है कोई रो रहा है, कोई पा रहा है कोई खो रहा है

कोई हँस रहा है कोई रो रहा है कोई पा रहा है कोई खो रहा है कोई ताक में है किसी को है गफ़लत कोई जागता है कोई सो रहा है कहीँ नाउम्मीदी ने बिजली गिराई कोई बीज उम्मीद के बो रहा है इसी सोच में मैं तो रहता हूँ ‘अकबर’ यह क्या हो रहा है यह क्यों हो रहा ...

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अकबर इलाहाबादी (गजल) – हंगामा है क्‍यूं बरपा, थोड़ी सी जो पी ली …..

हंगामा है क्यूँ बरपा, थोड़ी सी जो पी ली है डाका तो नहीं डाला, चोरी तो नहीं की है ना-तजुर्बाकारी से, वाइज़ की ये बातें हैं इस रंग को क्या जाने, पूछो तो कभी पी है उस मय से नहीं मतलब, दिल जिस से है बेगाना मक़सूद है उस मय से, दिल ही में जो खिंचती है वां दिल में ...

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बहादुर शाह जफर ( गजल ) – मोहब्बत चाहिए बाहम हमें भी हो तुम्हें भी हो

मोहब्बत चाहिए बाहम हमें भी हो तुम्हें भी हो ख़ुशी हो इस में या हो ग़म हमें भी हो तुम्हें भी हो. ग़नीमत तुम इसे समझो के इस ख़ुम-ख़ाने में यारो नसीब इक-दम दिल-ए-ख़ुर्रम हमें भी हो तुम्हें भी हो. दिलाओ हज़रत-ए-दिल तुम न याद-ए-ख़त-ए-सब्ज़ उस का कहीं ऐसा न हो ये सम हमें भी हो तुम्हें भी हो. हमेशा ...

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बहादुर शाह जफर ( गजल ) – देखो इन्साँ ख़ाक का पुतला बना क्या चीज़ है

देखो इन्साँ ख़ाक का पुतला बना क्या चीज़ है बोलता है इस में क्या वो बोलता क्या चीज़ है. रू-ब-रू उस जु़ल्फ़ के दाम-ए-बला क्या चीज़ है उस निगह के सामने तीर-ए-क़ज़ा क्या चीज़ है. यूँ तो हैं सारे बुताँ ग़ारत-गर-ए-ईमाँ-ओ-दीं एक वो काफ़िर सनम नाम-ए-ख़ुदा क्या चीज़ है. जिस ने दिल मेरा दिया दाम-ए-मुहब्बत में फंसा वो नहीं मालूम ...

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बहादुर शाह जफर ( गजल ) – मर गए ऐ वाह उन की नाज़-बरदारी में हम

मर गए ऐ वाह उन की नाज़-बरदारी में हम दिल के हाथों से पड़े कैसी गिरफ़्तारी में हम. सब पे रौशन है हमारी सोज़िश-ए-दिल बज़्म में शम्मा साँ जलते हैं अपनी गर्म-बाज़ारी में हम. याद में है तेरे दम की आमद-ओ-शुद पुर-ख़याल बे-ख़बर सब से हैं इस दम की ख़बर-दारी में हम. जब हँसाया गर्दिश-ए-गर्दूं ने हम को शक्ल-ए-गुल मिस्ल-ए-शबनम ...

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