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सिद्धान्‍त गढ़ने और विज्ञापन देने से नहीं होगा चुनाव सुधार- प्रो. कौशल किशोर

– चुनाव को पारदर्शी बनाने में सोशल मीडिया का योगदान महत्‍वपूर्ण

– देश की 125 करोड़ जनता और राजनैतिक दलों को आगे आना होगा

संतकबीरनगर। बीएचयू के राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो0 कौशल किशोर मिश्र ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव महानुष्ठान की तरह है। लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने के लिए चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की जरूरत है। लोकतंत्र में जनभागीदारी जितनी ज्यादा होगी हमारा लोकतंत्र उतना ही सशक्त होगा।

प्रो. मिश्र ने उक्‍त बातें एचआरपीजी कालेज खलीलाबाद में भारतीय लोकतंत्र एवं siddarth Univercity, Siddarthnagar, Gorakhpur, HRPG collage, khalilabad, Rastriy Sangosthi, Chunav sudhar, santkabirnagar, Newskbn.inचुनाव सुधार : चुनौतियाँ एवं संभावनाएं विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी को सम्‍बोधित करते हुए बतौर मुख्‍य अतिथि कही। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से अब तक कोई भी राजनीतिक दल भारतीय लोकतंत्र में चुनाव सुधार की प्रक्रिया को लेकर गंभीर नहीं है। चुनाव में जाति-धर्म की राजनीति ने लोकतंत्र को चोट पहुचाई  है। आज भारतीय लोकतंत्र के सामने कई चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिये व चुनाव सुधार के लिए देश के 125 करोड़ लोगों और राजनीतिक दलों को एक साथ आना होगा। साथ ही चुनाव आयोग को सशक्त बनाने की जरुरत है। प्रो. मिश्र ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि आजादी के सत्तर साल बाद भी शत प्रतिशत मतदान हम नहीं कर पा रहे हैं। आज भी हमे मतदाता जागरूकता के लिए रैलियां निकालनी पड़ रही हैं यह सोचनीय विषय है। उन्होंने कहा कि आयोग बनाने, सिद्धांत गढ़ने और विज्ञापन देने से चुनाव सुधार नहीं होगा। इस दिशा में सोच बदलने की जरूरत है। प्रो. मिश्र ने कहा कि 2017 के चुनाव में अगर धनबल पर लगाम लगा तो यह चुनाव सुधार के दिशा में एक कारगर कदम होगा। उन्होंने कहा कि चुनाव को पारदर्शी बनाने में सोशल मीडिया की अहम भूमिका है । आज के इस नए मीडिया ने तमाम सार्थक विमर्श और बदलाव को जन्म दिया है। चुनाव सुधार और भारतीय लोकतंत्र के सामने मौजूदा चुनौतियों से निपटने व लोगों को जागरूक करने में सोशल मीडिया सशक्त माध्यम है।

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