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चावल, गेहूं के आटे में केमिकल मिलाकर बनाते थे नकली बेसन

– कुछ मात्रा में मटर की दाल भी मिलाते थे बेसन में

– ढाई सौ ग्राम केमिकल से बनता था 5 कुन्‍तल बेसन

संतकबीरनगर।

नकली बेसन बनाने वाले कारोबारी लाभ कमाने के लिए काफी प्रयोग करते थे। वे चावल, गेहूं, मटर की दाल तथा केमिकल के सहारे बेसन बनाते थे।

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नकली बेसन बनाने वाले केमिकल को दिखाते हुए स्‍वाट टीम के कांस्‍टेबल मुनीर आलम

पकड़े गए कारोबारियों ने बताया कि वे बेसन बनाने के लिए चावल के टुकड़े, खड़ा चावल, टूटा हुआ गेहूं, मटर की दाल व अन्‍य सामान लेकर एक अनुपात में मिलाकर पीसते थे। पीसने के बाद उसमें रंग मिलाया जाता था। उस रंग के चलते वह बेसन की तरह दिखने लगता था। जो केमिकल प्रयोग किया जाता था उसके ढाई सौ ग्राम से 5 कुन्‍तल बेसन को रंग दिया जाता था। उस केमिकल पर भी लिखा गया है कि खाने योग्‍य नहीं। लेकिन इन सारी बातों को नजरंदाज करके इस तरह का कार्य करने वाले ये कारोबारी लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। जो चावल व गेहूं आदि था वह भी सड़ा हुआ था। उसे बेसन में मिला दिया जाता था। कुल मिलाकर यह बेसन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए काफी हानिकारक था।

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