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लॉक डाउन में बेगुनाहों की सेवा कर इन्‍सानियत का फर्ज निभा रहे ब्‍लाक प्रमुख मुमताज ( देवीलाल गुप्‍त की रिपोर्ट )

  • छुट्टा गायों, सांड़ो , कुत्‍तो और बन्‍दरों के लिए कर रहे हैं भोजन की व्‍यवस्‍था
  • सुबह से लेकर देर रात तक करते हैं बेजुबान पशुओं की सेवा, पिलाते हैं पानी

संतकबीरनगर, न्‍यूज केबीएन

कोरोना को लेकर चल रहे लॉकडाउन में सेमरियांवा ब्‍लाक प्रमुख मुमताज अहमद इन्‍सानियत का फर्ज निभाने में पीछे नहीं हैं। इन्‍सानों की सेवा तो वे करते ही हैं, साथ ही बेजुबान पशुओं की सेवा में वे सुबह से लेकर देर रात तक लगे रहते हैं। बेजुबानों के बीच पहुंचकर उनकी सेवा करने वाले मुमताज अहमद न सिर्फ उनके लिए दाने की व्‍यवस्‍था करते हैं, बल्कि उनको पानी भी पिलाते हैं।

अपने भाई के साथ बेजुबानों की सेवा करते हुए सेमरियांवा ब्‍लाक प्रमुख मुमताज अहमद

बेजुबानों की सेवा करके इंसानियत का फर्ज निभाने वाले ब्‍लाक प्रमुख मुमताज अहमद जब सुबह अपने भाई के साथ क्षेत्र के गरीबों, मजलूमो और अन्‍य लोगों की सेवा में निकलते हैं तो उनकी गाड़ी में आदमियों के लिए राहत सामग्री तो रहती ही है , पशुओं के लिए दाने, गेहूं, आटा, चना, केले, मूंगफली के दाने के साथ ही पानी पिलाने के लिए एक बाल्‍टी रख दी जाती है। वे रास्‍ते में निकलते हैं तो जहां भी वे पशुओं को देखते हैं तो उनकी गाड़ी तुरन्‍त ही रुक जाती है। वे गाड़ी की डि‍ग्गी खोलते हैं और उसमें से पशु के लिए आवश्‍यक दाना निकालते हैं और खिलाने लगते हैं। इसके साथ ही गाड़ी में रखा पानी से भरा गैलन निकालते हैं तथा उसमें से पानी बाल्‍टी में उड़ेलते हैं तथा जी भरकर पानी पिलाते हैं। वहां के पशु जब तृत्‍प हो जाते हैं तो वे निकल पड़ते हैं अपनी अगली मंजिल पर। इस प्रकार जनता की सेवा के साथ ही पशुओं की सेवा का उनका यह सिलसिला लगातार चल रहा है। जिला मुख्‍यालय पर आकर वे आवारा पशुओं तथा बन्‍दरों को भी देर रात तक भोजन कराते रहते हैं। उनकी यह पशु सेवा चर्चाओं का केन्‍द्र बनी हुई है। इस नेक कार्य में उनका साथ देते हैं, मुश्ताक़ अहमद, शकील अहमद, विकास चौधरी खमरिया प्रधान  व मोहम्मद इरफ़ान जिनका निरन्‍तर सहयोग उन्‍हें मिलता रहता है।

अब तो पशु भी पहचानने लगे हैं ब्‍लाक प्रमुख की गाड़ी

बेजुबान पशुओ की हालत तो यह है कि वे सैकड़ो गाडि़यों के बीच में ब्‍लाक प्रमुख की गाड़ी को पहचान लेते हैं। गाड़ी खड़ी होते ही पशु वहां पर खिंचे हुए चले आते हैं। उन्‍हें यह लगता है कि अब उनका मसीहा आ गया है और उन्‍हें भोजन मिलने वाला है। अपनी गाड़ी में वह नहीं होते हैं तब भी पशु गाड़ी के पास खड़े रहते हैं।  

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