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इस तरह से हुआ 150 बेड के प्रभा इण्‍स्‍टीच्‍यूट आफ मेडिकल साइंसेज के फर्जीवाड़े का खुलासा

–    इस नाम के दो हास्पिटल विधियानी में हो रहे थे संचलित
–    दोनों का वा‍स्‍तविक धरातल पर नहीं है कोई भी अस्तित्‍व

संतकबीरनगर, न्‍यूज केबीएन ।

कागजों में फर्जीवाड़ा करके संचलित किए जा रहे प्रभा इंस्‍टीच्‍यूट आफ मेडिकल साइंसेज के 150 बेड के दो अस्‍पतालों का खुलासा किस प्रकार हुआ इसकी भी एक रोचक कहानी है। इन दोनों अस्‍पतालों का वास्‍तविकता के धरातल पर कहीं कोई भी अस्तित्‍व नहीं है। इस नाम के दोनो हास्पिटल खलीलाबाद के विधियानी मुहल्‍ले में संचलित हो रहे हैं इस पर भी लोग आश्‍चर्य व्‍य‍क्‍त कर रहे हैं।

संतकबीरनगर जनपद से दो लोगों के द्वारा उत्‍तर प्रदेश स्‍टेट मेडिकल फैकल्‍टी में एएनएम, जीएनएम तथा अन्‍य कोर्स चलाने की मान्‍यता के लिए आवेदन किया गया था। ये दोनो आवेदन अग्रसारी अधिकारी की मेज पर पहुंचे तो दोनो में सम्‍बन्धित अस्‍पतालों के जो कागजात लगाए गए थे उनमें अन्‍तर दिखाई दिया। प्रभा देवी चैरिटेबल ट्रस्‍ट के मैनेजर वैभव चतुर्वेदी के द्वारा संचलित प्रभा इंस्‍टीच्‍यूट आफ मेडिकल साइंसेज के 100 और 50 बेड के दो अस्‍पतालों तथा एक अन्‍य व्‍यक्ति द्वारा संचलित अन्‍य अस्‍पताल के प्रारुप भिन्‍न भिन्‍न थे। यही नहीं नियत समयावधि के दौरान स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अधिकारियों के द्वारा जारी प्रमाण पत्र पर हस्‍ताक्षर भी भिन्‍न भिन्‍न ही थे। इसके बाद स्‍टेट मेडिकल फैकल्‍टी के प्रशासनिक अधिकारी के कान खड़े हो गए। 15 जून 2020 को इन दोनों अस्‍पतालों की वास्‍तविकता जानने की गरज से उन्‍होने संतकबीरनगर जनपद के मुख्‍य चिकित्‍साधिकारी को पत्र लिखा। पत्र पाने के बाद मुख्‍य चिकित्‍साधिकारी डॉ हरगोविन्‍द सिंह ने प्रभा देवी चैरिटेबल ट्रस्‍ट द्वारा संचलित 100 बेड और 50 बेड के दो अस्‍पताल तथा एक अन्‍य अस्‍पताल की जांच शुरु की। गहन जांच के बाद उन्‍होने उत्‍तर प्रदेश स्‍टेट मेडिकल फैकल्‍टी के प्रशासनिक अधिकारी को अपनी जांच रिपोर्ट भेजी। उस रिपोर्ट में उन्‍होने बताया कि मांगी गई सूचनाओं के आधार पर प्रभादेवी चैरिटेबल ट्रस्‍ट द्वारा संचलित दोनों अस्‍पतालों का कहीं कोई अस्तित्‍व ही नहीं है। उनके द्वारा प्रस्‍तुत किए गए पंजीकरण प्रमाण पत्र पूरी तरह से अवैध हैं। वहीं दूसरे व्‍यक्ति द्वारा संचलित अस्‍पताल का पंजीकरण वैध है , लेकिन उसके बेडों की संख्‍या वर्तमान समय में 45 ही है।

इतने बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ ही नहीं होता अगर दो व्‍यक्तियों के द्वारा संचलित अस्‍पतालों के द्वारा प्रेषित आवेदन पत्र में अलग प्रारुप में अस्‍पताल का पंजीकरण प्रमाण पत्र नहीं प्राप्‍त होता। इसके बाद एएनएम, जीएनएम जैसी डिग्री देने के फर्जीवाड़ा शुरु हो जाता और रोजगार के अभाव में प्रशिक्षण लेने के लिए आने वाले लोगों को विभिन्‍न तरह के शोषण का शिकार होना पड़ता ।

… क्‍या प्रस्‍तुत किए गए अन्‍य प्रमाण पत्र भी है जाली

मान्‍यता के लिए विविध प्रमाण पत्रों को साथ में लगाया जाता है। इनमें फायर ब्रिगेड द्वारा फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र, किसी अभियन्‍ता के द्वारा जारी बिल्डिंग के कार्यानुकूल बने होने का प्रमाण पत्र, एसडीएम के द्वारा जारी किया गया भू उपयोग प्रमाण पत्र, चिकित्‍सकों व स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों के सहमति प्रमाण पत्र  के साथ ही साथ अन्‍य प्रमाण पत्र भी लगाए जाते हैं। प्रश्‍न यह उठता है कि जब मुख्‍य प्रमाण पत्र ही जाली है, तो क्‍या अन्‍य प्रमाण पत्र सही हैं।

उपर वाला हस्‍ताक्षर सीएमओ संतकबीरनगर का असली हस्‍ताक्षर है। जबकि पंजीकरण प्रमाण पत्र पर बना फर्जी हस्‍ताक्षर है।

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