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गुरुनानक जयंती : डीएम दिव्या मित्तल ने कहा गुरुनानक देव के उपदेश सभी के लिए उपयोगी

गुरुनानक जयंती : डीएम दिव्या मित्तल ने कहा गुरुनानक देव के उपदेश सभी के लिए उपयोगी

युवा समाजसेवी गगनदीप सिंह “शैंकी” ने कहा कि गुरु नानक देव ने उन अच्छाइयों पर जोर दिया, जिससे समाज को ऊंचा उठाने में मदद मिले

संतकबीरनगर : खलीलाबाद में श्रीगुरु नानक देव जयंती श्रद्धाभाव के साथ मनाई गई। यहां पर गुरुद्वारा को भव्य रूप से सजाया गया। अंखड पाठ की समाप्ति के बाद शबद कीर्तन हुआ। अटूट लंगर बरताया गया। कोरोना की समाप्ति की अरदास की गई। खलीलाबाद के गोला बाजार स्थित गुरुद्वारा में सिख संगत ने गुरुद्वारा में माथा टेककर परिवार में खुशहाली की प्रार्थना की। यहां पर ज्ञानी जोगिंदर सिंह ने गुरुवाणी का गायन कर संगत को निहाल किया। यहां पर कार्यक्रम सोशल डिस्टेंसिंग के साथ संपन्न हुए। अरदास के बाद लंगर का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में पहुंची जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने गुरुनानक देव के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हम सभी को उनके बताए हुए मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरुनानक देव जी ने कभी भेद – भाव नही किया, सभी को एक दृष्टि से देखते हुए सभी के लिए समर्पण भाव से काम किया। गुरुद्वारा के अध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि अंधविश्वास और आडंबरों के कट्टर विरोधी गुरु नानक का प्रकाश उत्सव (जन्मदिन) कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है। गुरु नानक जी पंजाब के तलवंडी नामक स्थान पर एक किसान के घर जन्मे थे। उनके मस्तक पर शुरू से ही तेज आभा थी। इस मौके पर बीबी बलवंत कौर, सतविंदर पाल जज्जी, प्रितपाल सिंह, सन्नी सिंह, हन्नी सिंह, गगनदीप सिंह शैंकी, जसविंदर सिंह,मन्नी सिंह, रवनीत सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

युवा समाजसेवी गगनदीप सिंह “शैंकी” ने कहा कि गुरु नानक देव ने उन अच्छाइयों पर जोर दिया, जिससे समाज को ऊंचा उठाने में मदद मिले

संतकबीरनगर : गगन होंडा के प्रोपराइटर व युवा समाजसेवी गगनदीप सिंह शैंकी ने कहा कि गुरू नानक साहिब जी ने गृहस्थ जीवन में रहते हुए अपना आध्यात्मिक व सामाजिक जीवन को जीने की कला समझायी । गुरू नानक साहिब जी द्वारा स्थापित सिख जीवन दर्शन का आधार मानवता की सेवा, कीर्तन, सत्संग एवं एक सर्वशक्तिमान ईश्वर के प्रति विश्वास है। गगनदीप सिंह ने कहा कि गुरु नानक देव ने उन अच्छाइयों पर जोर दिया, जिससे समाज को ऊंचा उठाने में मदद मिले। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देवजी ने जात−पांत को समाप्त करने और सभी को समान दृष्टि से देखने की दिशा में कदम उठाते हुए ‘लंगर’ की प्रथा शुरू की थी। लंगर में सब छोटे−बड़े, अमीर−गरीब एक ही पंक्ति में बैठकर भोजन करते हैं। आज भी गुरुद्वारों में उसी लंगर की व्यवस्था चल रही है। इस में सेवा और भक्ति का भाव मुख्य होता है।

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