Breaking News

मुम्‍बई में भाजपा और शिवसेना बराबर, 9 में से 8 शहरों में भाजपा जीती

मुंबई. गुरुवार को महाराष्ट्र में मुंबई-पुणे समेत 10 शहरों की म्युनिसिपल कॉरपोरेशन में हुए चुनाव के नतीजे आए। बृह्नमुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) में 20 साल में पहली बार शिवसेना-बीजेपी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। इसमें किसी को भी 114 सीटों की मेजॉरिटी हासिल नहीं हुई। शिवसेना ने 84 और बीजेपी ने 82 सीटों पर जीत हासिल की। कांग्रेस को 31 और एनसीपी को 9 सीटें मिलीं। राज ठाकरे की एमएनएस को 7 और अन्य को 14 सीटें मिलीं हैं। महाराष्ट्र के बाकी 9 शहरों में से 8 म्युनिसिपल कॉरपोरेशन पर BJP और एक पर शिवसेना आगे है। बता दें कि बीएमसी में बीजेपी 1987 से चुनाव लड़ रही है और उसे पहली बार इतनी ज्यादा सीटें हासिल हुई हैं। नतीजे सामने आने के बाद उद्धव ठाकरे ने कहा कि इस बार बीएमसी का मेयर ही नहीं, बल्कि अगले चुनावों में सीएम भी शिवसेना का ही होगा।

चुनाव जीतने के बाद भाजपा कार्यकर्ता खुशी मनाते हुए

फडणवीस ने कहा- ट्रांसपरेंसी के एजेंडे को जनता ने सराहा
 महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “मुंबई महानगर पालिका में जिस तरह से बीजेपी ने पारदर्शिता के मुद्दे पर चुनाव लड़ा, उसे लोगों ने सपोर्ट किया। लगभग 20 सीटें ऐसी हैं, जिनमें बहुत कम वोटों से बीजेपी हारी है। जिस तरह से मुंबई ने बीजेपी को सपोर्ट किया, उसे देखकर ये साफ है कि ट्रांसपरेंसी के एजेंडे को जनता ने आशीर्वाद दिया है।”
 
ये नेता लॉटरी से चुने गए
 बीजेपी के अतुल शाह ने गिरगांव के वॉर्ड नंबर 220 से चुनाव लड़ा था। यह शिवसेना का मजबूत गढ़ है। अतुल शाह और उनके विरोधी सुरेंद्र बागालकर दोनों को ही 5,496 वोट मिले। कैंडिडेट्स की मौजूदगी में तीन बार रिकाउंटिंग होने के बाद भी दोनों कैंडिडेट्स को बराबर वोट मिले। स्टेट इलेक्शन कमीशन ने बताया कि इसके बाद प्रोसेस के तहत दोनों कैंडिडेट्स के नाम दो चिट पर लिखे गए और लॉटरी निकाली गई। इसमें अतुल शाह को जीत मिली।

नाचते हुए शिवसेना के कार्यकर्ता

महाराष्ट्र के लोगों को पीएम ने दी बधाई
म्युनिसिपल इलेक्शंस का रिजल्ट आने के बाद नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को महाराष्ट्र की जनता को बधाई दी। मोदी ने ट्वीट में कहा, “विकास की राजनीति और सुसाशन को महाराष्ट्र की जनता ने आशीर्वाद दिया, इसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं।”हर भारतीय बीजेपी में अपना विश्वास जता रहा है। हम पक्के इरादे के साथ मजबूत और संगठित भारत के निर्माण के लिए लगातार काम कर रहे हैं। मोदी ने अपने ट्वीट में बीजेपी वर्कर्स, चीफ मिनिस्टर देवेंद्र फडणवीस और महाराष्ट्र बीजेपी के प्रेसिडेंट राव साहब दानवे को भी धन्यवाद दिया।
BMC में क्या रहे नतीजे?
पार्टी/227 सीटें इस बार सीटें 2012 में सीटें
शिवसेना 84 75
बीजेपी 82 31
कांग्रेस 31 52
एनसीपी 9 13
मनसे 7 28
अन्य 14 28
1) शिवसेना-बीजेपी (84+82=166)
20 साल में पहली बार अलग-अलग चुनाव लड़ने वाली बीजेपी-शिवसेना के बीच अगर अलायंस होता है तो दोनों की मिलाकर 165 सीटें हैं। इस तरह दोनों मिलकर 5 साल और बीएमसी पर राज कर सकते हैं। बीजेपी के कई नेताओं ने प्रचार खत्म होते ही शिवसेना के खिलाफ बयानबाजी रोक दी थी। इस वजह से दोनों के बीच एक बार फिर अलायंस के आसार को नकारा नहीं जा सकता।
2) कांग्रेस अगर शिवसेना को सपोर्ट कर दे (84+31=115)
कांग्रेस अगर शिवसेना को सपोर्ट करने को राजी हो जाए तो उद्धव ठाकरे की पार्टी बीजेपी के बगैर बीएमसी पर राज कर सकती है।
महाराष्ट्र में BMC के नतीजे क्यों इतने मायने रखते हैं?
बृह्नमुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के चुनाव महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा अहमियत रखते हैं। इसकी वजह यह है कि यहां राज्य के बाकी शहरों की कॉरपोरेशन से ज्यादा सीटें हैं और मुंबई देश की फाइनेंशियल कैपिटल है। 20 साल से यानी 1997 से यहां बीजेपी-शिवसेना एकसाथ चुनाव लड़ रहे थे। लेकिन इस बार दोनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा।1992 में BMC में कांग्रेस-RPI गठबंधन जीता था। उसके बाद 1997 से अब तक शिवसेना का यहां दबदबा रहा है।
देश की फाइनेंशियल कैपिटल का बजट कई राज्यों से ज्यादा
BMC का सालाना बजट 37 हजार करोड़ रुपए का होता है। यह कई राज्यों के बजट से ज्यादा है। आधा बजट सैलरी और पेंशन में जाता है। BMC में 1 लाख से ज्यादा इम्प्लॉइज हैं।
इन नतीजों को ऐसे समझें
बीजेपी : 10 में से 8 शहरों में वह सबसे बड़ी पार्टी
20 साल में पहली बार शिवसेना से अलग होकर लोकल बॉडी इलेक्शन लड़ने की स्ट्रैटजी काम आई। पार्टी ने खुद को मजबूत किया। 2012 में बीएमसी में बीजेपी को 31 सीटें मिली थीं। उस वक्त कांग्रेस 52 सीटों के साथ दूसरी और 28 सीटों के साथ मनसे तीसरी पोजिशन पर थी। बीजेपी ने बीएमसी में कांग्रेस-मनसे दोनों को नुकसान पहुंचाया है।बीएमसी नतीजों के शुरुआती ट्रेन्ड में पिछड़ने के बाद वह आखिरी दौर की काउंटिंग में शिवसेना के करीब आकर खड़ी हो गई। पुणे, पिंपरी-चिंचवड, नासिक और नागपुर में वह सबसे बड़ी पार्टी बन गई। सिर्फ ठाणे में वह तीसरे नंबर पर है। महाराष्ट्र के 10 में से 8 शहरों में वह सबसे बड़ी पार्टी है।पुणे में उसने एनसीपी-मनसे से सीटें छीनी हैं। पिंपरी-चिंचवड में उसने एनसीपी को नुकसान पहुंचाया है।नागपुर में बीजेपी ने अपना दबदबा कायम रखा है।
शिवसेना : 10 में से 2 शहरों में नंबर-1, बाकी जगह BJP से पिछड़ी
शिवसेना ने मुंबई-ठाणे में अपना दबदबा कायम रखा है। दोनों जगहों पर वह सबसे बड़ी पार्टी है। पिछली बार भी वह इन दोनों शहरों में नंबर-1 थी। नासिक, उल्हासनगर, सोलापुर में वह दूसरी पोजिशन पर है। शिवसेना नागपुर में अपना खाता नहीं खोल पाई। पुणे में वह चौथे, पिंपरी चिंचवड और अकोला में वह तीसरे नंबर पर है।
 कांग्रेस : सभी 10 शहरों में पिछड़ी
10 शहरों में से सिर्फ नागपुर-अमरावती में कांग्रेस दूसरी पोजिशन पर है। बाकी जगहों पर वह तीसरी पोजिशन पर है। किसी भी शहर में वह पहली पोजिशन पर नहीं है। पिछले विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस की शहरी निकायों में भी स्थिति कमजोर हुई है।
 एनसीपी : 3 शहरों में दूसरी पोजिशन पर
शरद पवार की पार्टी का परफॉर्मेंस कांग्रेस से कुछ बेहतर है। वह ठाणे, पुणे, पिंपरी-चिंचवड मंे दूसरी पोजिशन पर है। अकोला-अमरावती में वह कांग्रेस से पीछे है।ठाणे में उसने बीजेपी और पुणे में शिवसेना को नुकसान पहुंचाया है। हालांकि, पुणे और पिंपरी-चिंचवड में उसके हाथ से सत्ता फिसलकर बीजेपी के पास चली गई।
 मनसे : 2 शहरों में ही खुला खाता, बाकी जगह जीरो सीट
मनसे ने मुंबई, नासिक और पुणे में मौजूदगी दर्ज कराई। बाकी जगहों पर वह खाता भी नहीं खोल पाई। 2012 में मनसे पुणे में दूसरे नंबर पर थी। बीएमसी में भी उसे 28 सीटें मिली थीं।

-----
लिंक शेयर करें