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350 वें प्रकाशोत्‍सव के अवसर पर सज गया है पटना साहिब

पटना : श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के 350वें प्रकाशोत्सव को मनाने की तैयारियां पिछले एक महीने से चल रही हैं परंतु अब जबकि मुख्य समागमों में एक सप्ताह ही रह गया है तो शहर में संगत की भीड़ रोजाना बढ़ती जा रही है। तख्त श्री हरिमंदिर साहिब, पटना साहिब के मुख्य गुरुधाम से लेकर गुरुद्वारा बाल लीला, कंगनघाट तथा गुरुद्वारा गऊघाट में संगत की बड़ी भीड़ हर समय दिखाई देती है।गुरुद्वारा श्री हरिमंदिर साहिब काम्पलैक्स का कोना-कोना बहुत बढिय़ा ढंग से संवारा तथा शृंगारा गया है जबकि अंदरूनी दीवारों व छतों को भी बेहद खूबसूरत बनाया गया है। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म इस जगह 1666 ईस्वी में हुआ था जबकि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब असम के दौरे पर थे। यह गुरुधाम उस जगह बना हुआ है, जो गुरु नानक देव जी के अनन्य सेवक सालसराय चौधरी से संबंधित थी। इस गुरुद्वारा साहिब से संबंधित जमीन उनके अपने बुजुर्गों की है।

गुरुद्वारा साहिब के बाईं ओर गली में श्री विशाल नाथ स्वामी जैन मंदिर स्थित है जोकि 750 वर्षों पुराना बताया जाता है। यह जगह भी सालसराय के बुजुर्गों से संबंधित है। यह मंदिर वाली जमीन एक जैनी ने सालसराय चौधरी को दी थी। इस मंदिर की विशेषता यह है कि इसमें ऋषभदेव भगवान की एक ऐसी मूॢत स्थापित है जो भारत में अन्य कहीं देखने को नहीं मिलती। मंदिर की मौजूदा हालत बहुत बढिय़ा नहीं है तथा इसकी मुरम्मत का काम सन् 2000 से चल रहा है। मुरम्मत की रफ्तार बहुत धीमी होने कारण अनुमान है कि यह 2018 तक मुकम्मल होगा। मंदिर कमेटी के प्रधान राज बहादुर सिंह वैध हैं जबकि राज कुमार मालकस सचिव हैं। इसी तरह गुरुद्वारा हरिमंदिर साहिब के दाईं ओर एक मस्जिद ख्वाजा अंबरशाह स्थित है। यह मस्जिद औरंगजेब के जमाने की बनी हुई है जोकि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब तथा गुरु गोङ्क्षबद सिंह जी का समकालीन था। लगभग 381 वर्ष पहले यह मस्जिद अस्तित्व में आई जबकि बिहार उस समय बंगाल का हिस्सा होता था तथा यहां के गवर्नर शाइस्ता खान थे।  शाइस्ता खान के नाजर का नाम ख्वाजा अंबरशाह था तथा यह मस्जिद उसने ही बनवाई थी। पाठक इस बात की जानकारी रखते होंगे कि जब बाल गोङ्क्षबद राय का जन्म हुआ था उनके श्रद्धालुओं में पंडित शिवदत्त, रहीम बख्श, पटना के नवाब पीर आरफ उद्दीन तथा सैयद भीखण शाह थे। सईद भीखण शाह उस समय बाल गोङ्क्षबद राय के दर्शनों हेतु पहुंचे तथा जितनी देर पटना साहिब में ठहर, वह इसी मस्जिद में खुदा की इबादत्त करते रहे। भीखण शाह जितना प्यार बाल गोङ्क्षबद को करते थे, उतनी ही श्रद्धा व विश्वास उन्हें अपने धर्म में भी थी।

अब यह एक करिश्मा ही था कि जब गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म हुआ तो पीर भीखण शाह उन्हें मिलने गए तथा उन्होंने उनके आगे मिठाई के 2 बर्तन रखे। वह जानना चाहते थे कि जो अद्भुत शख्सियत जन्म लेकर आई है वह कितनी उच्च पीर है। बाल गोङ्क्षबद राय ने दोनों बर्तनों पर अपने हाथ रखकर बताया कि वह ङ्क्षहदुओं व मुसलमानों के सांझे पीर हैं। आज श्री हरिमंदिर साहिब पटना में दाएं व बाएं मस्जिद तथा मंदिर का होना यह बताता है कि परमात्मा एक ही है। उन्हें पूजने वाले अलग-अलग रूप-रंग के हो सकते हैं। उनकी इबादत का तरीका भी अलग हो सकता है परंतु इसमें कोई फर्क नहीं है।
बाल गोङ्क्षबद राय अपने जन्म से लेकर साढ़े 6 वर्ष तक पटना में रहे तथा आज उनके 350वें जन्मदिन के अवसर पर जगह-जगह लंगर लग रहे हैं तथा पूरी श्रद्धा से देश-विदेश की संगत यहां पहुंच रही है। शहर में अलग-अलग जगहों पर बने स्वागती गेट भी साबित करते हैं कि गुरु गोङ्क्षबद सिंह जी सचमुच ‘उच्च के पीर’ थे।

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